श्रीडूंगरगढ़, 13 नवम्बर 2025: रेगिस्तान की माटी में अपनी भाषा, अपनी संस्कृति को सहेजने की एक अनूठी पहल होने जा रही है। मरूभूमि शोध संस्थान राजस्थानी भाषा को संवैधानिक दर्जा दिलाने के लिए कमर कस चुका है। बाल दिवस के अवसर पर संस्थान एक जन जागरण अभियान की शुरुआत करेगा, जिसका उद्देश्य राजस्थानी भाषा के महत्व को जन-जन तक पहुंचाना है।
संस्थान के सचिव, साहित्यकार श्याम महर्षि का कहना है कि राजस्थानी भाषा का साहित्य भंडार अथाह है, इसकी परंपराएं गौरवशाली हैं, फिर भी इसे संवैधानिक मान्यता न मिलना दुर्भाग्यपूर्ण है। मान्यता के अभाव में राजस्थानी बोलने वाले छात्र अपने भाषाई अधिकारों से वंचित हैं।
इस सिलसिले में, कार्यक्रम संयोजक रवि पुरोहित ने जानकारी दी कि नई पीढ़ी को भाषा के संस्कारों से जोड़ने के लिए 16 नवंबर, रविवार को राष्ट्रभाषा हिन्दी प्रचार समिति के प्रांगण में ‘उजास’ नामक एक विशेष कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। यह कार्यक्रम राजस्थानी कहानियों पर आधारित एक प्रश्नोत्तरी होगी। श्री छगनलाल सेवदा कार्यक्रम की अध्यक्षता करेंगे, जबकि मुख्य ब्लॉक शिक्षा अधिकारी सरोज पूनिया वीर मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहेंगी। बागेश्वरी साहित्य, कला व सांस्कृतिक विरासत संस्थान इस आयोजन में अपना सहयोग देगा।
कवयित्री भगवती पारीक ने बताया कि इस प्रश्नोत्तरी में 100 से अधिक विद्यार्थी भाग लेंगे। विजेताओं को न केवल नकद पुरस्कार मिलेंगे, बल्कि उन्हें अपनी भाषा और संस्कृति के प्रति प्रेम और ज्ञान को प्रदर्शित करने का एक मंच भी मिलेगा। प्रथम तीन विजेताओं को क्रमशः ₹1100, ₹700 और ₹500 के नकद पुरस्कार दिए जाएंगे। इसके साथ ही, पाँच विद्यार्थियों को सान्त्वना पुरस्कार भी मिलेंगे।
समारोह प्रबंधक सरोज शर्मा ने ‘उजास’ कार्यक्रम की रूपरेखा बताते हुए कहा कि इस अवसर पर बच्चों द्वारा नृत्य, गायन, कविता पाठ और एकल अभिनय जैसी प्रस्तुतियाँ भी दी जाएंगी। यह कार्यक्रम न केवल भाषा के प्रति जागरूकता फैलाएगा, बल्कि बच्चों को अपनी प्रतिभा दिखाने का भी अवसर प्रदान करेगा।
मरुभूमि के हृदय में धधकती राजस्थानी भाषा के प्रेम की यह ज्वाला ‘उजास’ बनकर अवश्य फैलेगी, ऐसी उम्मीद है।