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RBSE ने बढ़ाई 10वीं-12वीं परीक्षा फीस: अब हर स्टूडेंट को देने होंगे 850 रुपए, प्रैक्टिकल फीस भी दोगुनी

श्रीडूंगरगढ़, 13 नवम्बर, 2025। राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (RBSE) ने आगामी शैक्षणिक सत्र 2026-27 से 10वीं और 12वीं की बोर्ड परीक्षाओं के शुल्क में परिवर्तन करने का निर्णय लिया है। यह बदलाव विद्यार्थियों के लिए परीक्षा की लागत को थोड़ा बढ़ा देगा, लेकिन बोर्ड के लिए राजस्व में वृद्धि लाएगा।

अब नियमित (रेगुलर) और निजी (प्राइवेट) दोनों तरह के विद्यार्थियों को परीक्षा शुल्क के रूप में 850 रुपए देने होंगे। पूर्व में, नियमित छात्रों के लिए यह शुल्क 600 रुपए और निजी छात्रों के लिए 650 रुपए था। इस निर्णय से छात्रों पर मामूली आर्थिक प्रभाव पड़ेगा, लेकिन बोर्ड की वित्तीय स्थिति को सुदृढ़ करने में मदद मिलेगी।

इसके अतिरिक्त, प्रायोगिक परीक्षाओं (प्रैक्टिकल) के शुल्क में भी बदलाव किया गया है। अब प्रत्येक विषय के लिए प्रायोगिक परीक्षा शुल्क 100 रुपए से बढ़कर 200 रुपए हो गया है। यह शुल्क वृद्धि, 2017 के बाद पहली बार बोर्ड द्वारा की गई है, जो शिक्षा के क्षेत्र में हो रहे वित्तीय परिवर्तनों को दर्शाती है।

बोर्ड ने शुल्क में वृद्धि का प्रस्ताव राज्य सरकार को भेजा था, जिसे सरकार ने स्वीकृति दे दी है। इस विषय पर शिक्षा सचिव की अध्यक्षता में 16 अक्टूबर को जयपुर में एक महत्वपूर्ण बैठक हुई थी। इस बैठक में तत्कालीन बोर्ड सचिव कैलाश चंद्र शर्मा और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया था।

सरकार ने यह भी निर्देश दिया है कि अब परीक्षा शुल्क की समीक्षा प्रत्येक तीन वर्ष में की जाएगी। यह निर्णय यह सुनिश्चित करने के लिए लिया गया है कि शुल्क समय-समय पर प्रासंगिक बने रहें और शिक्षा के बदलते परिदृश्य के अनुरूप हों।

नई शुल्क दरों के अनुसार, नियमित विद्यार्थियों को अब 250 रुपए अधिक देने होंगे, जबकि निजी विद्यार्थियों को 200 रुपए अतिरिक्त चुकाने होंगे। यह वृद्धि 10वीं और 12वीं की परीक्षाओं में भाग लेने वाले लगभग 20 लाख विद्यार्थियों को प्रभावित करेगी।

इस शुल्क वृद्धि से बोर्ड की आय में उल्लेखनीय वृद्धि होने की संभावना है। वर्तमान में, बोर्ड को 10वीं और 12वीं की परीक्षाओं से लगभग 130 करोड़ रुपए की आय होती है। संबद्धता, संशोधन और प्रमाणपत्र शुल्क से लगभग 20 करोड़ रुपए की अतिरिक्त आय होती है। इस प्रकार बोर्ड की कुल वार्षिक आय लगभग 150 करोड़ रुपए है। नई शुल्क संरचना के साथ, बोर्ड की आय में और वृद्धि होने की उम्मीद है, जो शिक्षा क्षेत्र में विकास और सुधार के लिए अतिरिक्त संसाधन प्रदान करेगी।

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