श्रीडूंगरगढ़, 12 नवंबर 2025। आज भैरवाष्टमी के पावन अवसर पर श्रीडूंगरगढ़ और आसपास के इलाकों में भक्ति और श्रद्धा का अद्भुत संगम देखने को मिला। भैरव मंदिरों में सुबह से ही भक्तों का तांता लगा रहा, मानो आस्था का एक सागर उमड़ पड़ा हो। मंदिरों को विशेष रूप से सजाया गया था, और वातावरण में घंटियों और मंत्रों की मधुर ध्वनि गूंज रही थी। श्रद्धालु बाबा भैरव के दर्शन कर अपनी मनोकामनाएं पूर्ण करने की प्रार्थना कर रहे थे।
तोलियासर दरबार में भैरवाष्टमी की रात एक विशेष आयोजन था। रात्रि 12 बजे बाबा का दिव्य श्रृंगार किया गया, जो भक्तों के लिए एक अद्भुत अनुभव था। इसके बाद शानदार आतिशबाजी की गई, जिससे पूरा वातावरण प्रकाश से जगमगा उठा और भक्तों ने उत्साह से जयकारे लगाए। श्रद्धा और भक्ति के इस माहौल में, श्रद्धालुओं ने बाबा को 51 किलो का केक अर्पित किया, जो प्रेम और समर्पण का प्रतीक था।
श्रीडूंगरगढ़ के आड़सर बास स्थित भैरव मंदिर में भी उत्सव का माहौल था। यहां बीकानेर से आए कलाकार संदीप एंड पार्टी ने बाबा का मनमोहक श्रृंगार किया। यह श्रृंगार इतना सुंदर था कि हर कोई बाबा के रूप को निहारता रह गया। शाम को महाआरती के बाद, यहां भी बाबा को 51 किलो का केक भोग लगाया गया। भीखमचंद सेठिया परिवार द्वारा दोनों मंदिरों में श्रृंगार, सजावट और प्रसाद के आयोजन पारंपरिक रूप से किए जा रहे हैं।
गांव बिग्गा के प्रसिद्ध भैरव मंदिर में दिन भर रुद्राभिषेक सहित विभिन्न धार्मिक अनुष्ठान चले। माना जाता है कि रुद्राभिषेक करने से भक्तों की मनोकामनाएं पूरी होती हैं और कष्ट दूर होते हैं। रात को केक का भोग लगाया गया और प्रसाद वितरित किया गया। इसके बाद रात्रि जागरण का आयोजन किया गया, जिसमें भक्त पूरी रात भजन-कीर्तन करते रहे।
रानी बाजार में स्थित कोडमदेसर भैरव थान को भी फूलों से सजाया गया और विशेष पूजा अर्चना की गई। यहां लालजी झंवर, अशोक बैद, अशोक झाबक, नंदू नाई, राकेश दुगड़, रमेश मूंधड़ा, आर्य झाबक, रविशंकर साह, आयुष साह, शंकर नाई, हरिप्रसाद झंवर सहित अनेक महिला श्रद्धालुओं ने बाबा की आरती में भाग लिया।
मोमासर बास में स्थित श्रीविजय भैरव मंदिर में रात्रि जागरण का आयोजन हुआ, जिसमें बड़ी संख्या में भक्तों ने भाग लिया। आज भैरव पूजन, अभिषेक, हवन और महाप्रसाद के आयोजन संपन्न होंगे।
इस तरह, श्रीडूंगरगढ़ में भैरवाष्टमी का त्योहार श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जा रहा है। हर तरफ भक्ति का रंग चढ़ा हुआ है और भक्त बाबा भैरव के दर्शन कर अपनी आत्मा को तृप्त कर रहे हैं। यह त्योहार न केवल धार्मिक महत्व रखता है, बल्कि यह समुदाय को एक साथ लाने और सामाजिक सौहार्द को बढ़ावा देने का भी एक अवसर है।