साध्वी जी ने इस बात पर ज़ोर दिया कि सतोगुणी दूध पीने से सतोगुणी बुद्धि आती है। उन्होंने गायों के पालन और बच्चों को प्रेम और सेवा के संस्कार देने की बात कही। उनका मानना है कि गौकृपा से परिवारों और समाज का कल्याण हो सकता है।
उन्होंने दूध की शुद्धता पर विस्तार से बात की और युवाओं को अपने कुल की मान-मर्यादा को अपना गौरव समझने के लिए प्रेरित किया। गौसेवा के महत्व को बताते हुए, उन्होंने श्रद्धालुओं को गौकृपा के कई प्रसंग सुनाए और इसे अपने मन में भावपूर्वक धारण करने की बात कही।
कथा में दूर-दूर से आए गौसेवकों को समिति सदस्यों ने स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया। रविवार को कथा के तीसरे दिन आसपास के गांवों और क्षेत्र के विभिन्न गांवों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु कथा सुनने पहुंचे। आयोजन समिति के सदस्य कथा की व्यवस्थाओं को सुचारू रूप से संपन्न करने में लगे रहे।