कार्यक्रम का शुभारंभ माँ सरस्वती और माँ भारती के समक्ष दीप प्रज्वलन से हुआ। ज्ञान और विद्या की अधिष्ठात्री देवियों के आशीर्वाद से कार्यक्रम की आभा और भी बढ़ गई।
मुख्य वक्ता अंबिका डागा ने ‘कुटुंब प्रबोधन’ विषय पर अपने विचार व्यक्त करते हुए वर्तमान समय में परिवार के महत्व पर ज़ोर दिया। उन्होंने कहा कि बच्चों में संस्कार जगाने के लिए परिवार को समय देना सबसे ज़रूरी है। श्रीमती डागा ने मातृशक्ति को परिवार और समाज की आधारशिला बताते हुए उनके त्याग और समर्पण को नमन किया।
वहीं, मीनू बौद्धिजा ने भारतीय संस्कृति के विकास में महिलाओं के योगदान को रेखांकित करते हुए माताओं को सात शक्तियों का स्वरूप बताया। उन्होंने भारतीय संस्कृति के संरक्षण में महिलाओं की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया।
मीनू मोरवानी ने अपने भजनों से माहौल को भक्तिमय बना दिया। उनके मधुर स्वरों ने श्रोताओं को भाव-विभोर कर दिया।
कार्यक्रम का कुशल संचालन कमलेश प्रजापत ने किया, जबकि पूजा बंसल ने मंच पर उपस्थित अतिथियों का परिचय दिया। मातृशक्ति के ज्ञान को परखने के लिए एक सामान्य ज्ञान प्रतियोगिता का भी आयोजन किया गया, जिसमें विजेताओं को पुरस्कृत किया गया।
कार्यक्रम की संयोजिका और विद्यालय की प्रधानाचार्य कंचन व्यास ने सभी अतिथियों और मातृशक्ति का आभार व्यक्त किया। उन्होंने विद्यालय की टीम को कार्यक्रम के सफल आयोजन के लिए बधाई दी।