दरअसल, मूंगफली खरीद में कथित भ्रष्टाचार और गिरदावरी में अनियमितताओं की शिकायतों के बाद, प्रशासन ने बिजली बिल की अनिवार्यता लागू कर दी है। लेकिन, जिला परिषद सदस्य श्रीराम भादू ने इस व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा है कि इससे कई पात्र किसान खरीद से वंचित रह जाएंगे।
उपखंड अधिकारी को लिखे पत्र में भादू ने क्षेत्र की विशिष्ट परिस्थितियों का हवाला दिया है। उन्होंने बताया कि गोजा लट रोग के कारण कई किसानों ने अपने कुएं से दूर, पड़ोसी के खसरे में खेत किराए पर लेकर मूंगफली की फसल बोई है। अब उनके सामने यह समस्या है कि पड़ोसी के खेत के नाम पर बिजली का बिल वे कैसे प्रस्तुत करेंगे।
इसके अतिरिक्त, भादू ने बताया कि कई स्थानों पर एक खसरे में दो कुएं योजना के तहत विद्युत कनेक्शन हैं, जिनका बिल एक ही व्यक्ति के नाम पर आता है, जबकि भाइयों का संयुक्त स्वामित्व है। ऐसे में, बंटवारे के अनुसार काश्त करने वाले भाई अपने-अपने नाम से बिजली का बिल कैसे प्रस्तुत करेंगे, खासकर जब बिल उनके दिवंगत पिता के नाम पर हो?
कुछ किसानों के कुएं बाहर क्षेत्र में स्थानांतरित हो गए हैं, लेकिन विद्युत कनेक्शन अभी भी पुराने नाम पर ही हैं। इससे गिरदावरी और बिजली बिल के नामों में भिन्नता आ गई है। वहीं, छोटे किसान जिनके अपने नाम पर खेत में सिंचाई कुएं नहीं हैं, वे पड़ोसी कुआं धारकों से पानी लेकर अपनी भूमि पर मूंगफली की खेती करते हैं। ऐसे किसानों के लिए बिजली बिल प्रस्तुत करना एक बड़ी चुनौती है।
भादू ने राजस्व रिकॉर्ड का हवाला देते हुए बताया कि उपखंड क्षेत्र में लगभग 65,000 खसरों में मूंगफली की फसल बोई गई है, जबकि केवल 20,165 खसरे ही खरीद के लिए पंजीकृत हुए हैं। इससे स्पष्ट होता है कि बड़ी संख्या में पात्र किसान पंजीयन से वंचित रह गए हैं।
उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि पात्र किसानों को लाभान्वित करने के लिए पंजीयन पोर्टल को फिर से खोला जाए, ताकि वे भी अपनी उपज बेच सकें और उन्हें इस संकट की घड़ी में कुछ राहत मिल सके।
अब देखना यह है कि प्रशासन किसानों की इन समस्याओं पर कितनी जल्दी ध्यान देता है और उन्हें मूंगफली की बिक्री में आ रही दिक्कतों से कैसे निजात दिलाता है। किसानों को उम्मीद है कि उनकी समस्याओं को सुना जाएगा और उन्हें न्याय मिलेगा।