गौरतलब है कि सातलेरा में पानी की समस्या काफी समय से बनी हुई थी, जिससे ग्रामीण परेशान थे। ग्रामीणों के अनुसार, गाँव के दोनों सरकारी ट्यूबवेल ख़राब पड़े थे – एक लगभग डेढ़ साल से और दूसरा दो महीने से अधिक समय से। इस बारे में कई बार विभाग को सूचित किया गया, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
ग्रामीण राजूराम जाखड़ ने बताया कि ट्यूबवेल खराब होने की वजह से गांव में पीने के पानी की भारी किल्लत हो गई थी। लोगों को अपनी प्यास बुझाने के लिए टैंकरों से पानी खरीदने के लिए मजबूर होना पड़ रहा था, जिसके लिए उन्हें लगभग ₹500 प्रति टैंकर खर्च करने पड़ रहे थे। पानी की कमी का असर पशुओं पर भी देखने को मिला, जो रोज़ाना प्यास से व्याकुल रहते थे।
ग्रामीणों ने इस समस्या से निजात पाने के लिए उपखंड अधिकारी श्रीडूंगरगढ़ से दोनों ट्यूबवेलों को जल्द चालू करवाने की प्रार्थना की थी, ताकि आमजन और पशुधन को राहत मिल सके।
खबरों के प्रकाशन के बाद प्रशासन हरकत में आया और विभाग ने एक ट्यूबवेल को ठीक कर दिया है। हालांकि, दूसरा ट्यूबवेल अभी भी बंद पड़ा है, जिससे पानी की समस्या पूरी तरह से खत्म नहीं हुई है।
जागरूक ग्रामीण युवा कार्यकर्ता गौरीशंकर शर्मा ने बताया कि दूसरा ट्यूबवेल विद्युत विभाग से जुड़ी तकनीकी समस्या के कारण बंद है। ग्रामीणों को उम्मीद है कि विभाग जल्द ही इस समस्या का समाधान निकालेगा और सातलेरा को पूरी तरह से जल संकट से मुक्ति दिलाएगा। अब देखना यह है कि प्रशासन और संबंधित विभाग इस दिशा में कितनी जल्दी सक्रिय होते हैं और सातलेरा के लोगों को कब तक पूरी तरह से पानी की समस्या से निजात मिलती है।