इन सूचियों में किसान के पंजीयन के साथ-साथ खसरा नंबर और राजस्व हल्के का नाम भी दर्ज होगा। यदि किसी किसान को अपने पंजीकरण या गिरदावरी के संबंध में कोई शंका या शिकायत है, तो वे तहसीलदार, उपखंड अधिकारी, या सहकारी समिति के जनरल मैनेजर को सूचित कर सकते हैं। प्राप्त शिकायतों की गहन जांच की जाएगी।
जिला कलेक्टर ने यह भी निर्देश दिए हैं कि किसानों को तुलाई की तारीख आवंटित होने से पहले, गलत आधार पर किए गए सभी पंजीकरणों को पांच दिनों के भीतर रद्द करने की अनुशंसा की जाए।
यह सुनिश्चित करने के लिए कि जानकारी आसानी से उपलब्ध हो, प्रत्येक ग्राम पंचायत मुख्यालय पर इन सूचियों को चस्पा किया जाएगा। तहसीलदार श्रीवर्द्धन शर्मा ने पंचायत समिति को निर्देश देते हुए सूचियाँ भेज दी हैं, ताकि हर ग्राम पंचायत भवन के नोटिस बोर्ड पर उस गांव की सूची का प्रकाशन किया जा सके। किसान और ग्रामीण स्वयं सूची का अवलोकन कर सकेंगे और किसी भी गलत या निराधार टोकन के मामले में शिकायत दर्ज करा सकेंगे, जिसकी जांच की जाएगी।
खरीद प्रक्रिया को और अधिक पारदर्शी बनाने के लिए, जिला कलेक्टर ने उपखंड अधिकारी को प्रत्येक खरीद केंद्र पर राजस्व कार्मिकों की नियुक्ति करने के निर्देश दिए हैं। ये कार्मिक गिरदावरी और खरीद के समय किसान द्वारा प्रस्तुत गिरदावरी का मिलान करेंगे और मिलान के बाद ही तुलाई करवाएंगे।
पिछले दिनों जिला कलेक्टर नमृता वृष्णि ने उपखंड अधिकारियों को खेतों में पहुंचकर फसल का भौतिक सत्यापन करने का आदेश दिया था। प्रत्येक उपखंड मुख्यालय पर पांच से दस हजार टोकन वितरित किए गए हैं। अब जिला कलेक्टर ने टोकन प्राप्त करने वालों की सूची जारी कर दी है, जिसे कोई भी किसान पंचायत मुख्यालय भवन के नोटिस बोर्ड पर देख सकता है। यदि किसी किसान को अपनी खेत की रिपोर्ट गलत लगती है, तो वे तुरंत शिकायत कर सकते हैं।
कलेक्टर ने कहा है कि यदि कोई रिपोर्ट गलत पाई जाती है, तो फर्जी टोकन प्राप्त करने वाले के खिलाफ संबंधित थाने में एफआईआर दर्ज करवाई जाएगी। इसके साथ ही ई-मित्र संचालक के खिलाफ भी एफआईआर दर्ज की जाएगी।