घरों में कामकाज ठप हो गया है। ग्रामीणों को आटा पिसवाने और अपने मोबाइल फोन चार्ज करने के लिए दूसरे मोहल्लों में जाकर मदद मांगनी पड़ रही है। पशुओं के लिए चारा काटना भी एक बड़ी चुनौती बन गया है, क्योंकि बिजली के अभाव में मशीनें चलना मुश्किल है।
गांव के लोगों का कहना है कि उन्होंने विभाग को पिछले चार दिनों में लगभग चालीस बार सूचित किया है, लेकिन उनकी शिकायतों पर कोई ध्यान नहीं दिया गया है। ऐसा लगता है, मानो उनकी पुकार अनसुनी कर दी गई हो।
गांव के सरपंच और प्रशासक ओमप्रकाश शर्मा ने इस स्थिति पर गहरा असंतोष व्यक्त किया है। उन्होंने बताया कि गांव में महीने में लगभग दस दिन बिजली गुल रहती है, जिससे लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। शर्मा ने विभागीय अधिकारियों को लगातार सूचना देने के बावजूद समस्या का समाधान न होने पर कड़ी नाराजगी जताई है। उन्होंने बुधवार को ग्रामीणों के साथ मिलकर विभागीय अधिकारी का घेराव करने की चेतावनी दी है, ताकि इस समस्या का जल्द से जल्द समाधान हो सके और गांव में फिर से रोशनी लौट सके।