देवउठनी एकादशी के इस पावन अवसर पर, घरों में तुलसी विवाह की विधि धूमधाम से संपन्न कराई गई। महिला वर्ग में इन आयोजनों को लेकर विशेष उत्साह का माहौल था। पुजारी, मंदिरों के साथ-साथ कई घरों में पहुंचे और भगवान सालिग्राम के साथ तुलसी का विवाह संपन्न कराया।
कई घरों में तो तुलसी जी का विवाह पुत्री की तरह विधिपूर्वक संपन्न कराया गया। इन स्थानों पर तुलसी के पौधे को दुल्हन की तरह सजाया गया था। भगवान सालिग्राम का हर्षोल्लास के साथ स्वागत किया गया। बाराती बने परिजनों ने खूब नाच-गाना किया और तुलसी फेरे भी संपन्न करवाए गए। इस शुभ अवसर पर महिलाओं ने भजन-कीर्तन के आयोजन किए, जिससे वातावरण भक्तिमय हो गया।
देवउठनी एकादशी पर तुलसी विवाह का यह आयोजन, श्रीडूंगरगढ़ के लोगों की गहरी आस्था और परंपराओं के प्रति समर्पण का प्रतीक था। यह न केवल एक धार्मिक अनुष्ठान था, बल्कि पारिवारिक मिलन और सामाजिक सौहार्द का भी एक सुंदर अवसर था।