शनिवार को तेजा मंदिर परिसर में ई-मित्र संचालकों की एक महत्वपूर्ण बैठक हुई, जिसमें एक संघर्ष समिति का गठन किया गया। समिति ने सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया कि जब तक प्रशासन इस आदेश का समाधान नहीं निकालता, तब तक सभी ई-मित्र केंद्र बंद रहेंगे।
श्रीडूंगरगढ़ शहर और आसपास के गांवों से आए ई-मित्र संचालकों ने अनिश्चितकालीन हड़ताल की घोषणा करते हुए उपखंड कार्यालय पहुंचकर उपखंड अधिकारी को ज्ञापन सौंपा।
संघर्ष समिति के अध्यक्ष सहीराम ने बताया कि सूचना प्रौद्योगिकी और संचार विभाग, श्रीडूंगरगढ़ ने शुक्रवार को एक पत्र जारी कर उनसे गिरदावरी पंजीयन के टोकन और दस्तावेजों की पीडीएफ फाइलें मेल करने का आदेश दिया है। उनका कहना है कि यह कार्य अत्यंत श्रमसाध्य और समय लेने वाला है।
समिति के सचिव जितेंद्र गोदारा ने प्रशासन से आग्रह किया है कि वे राजफैड के पोर्टल से सीधे जानकारी प्राप्त करने की व्यवस्था करें। उन्होंने कहा कि ई-मित्र संचालकों के लिए हजारों गिरदावरी और टोकन दस्तावेजों को भेजना संभव नहीं होगा।
इस आंदोलन में समिति के उपाध्यक्ष रामनिवास खिलेरी, कोषाध्यक्ष मनोज सिद्ध, मंत्री मोहित शर्मा, महामंत्री भगवानाराम गोदारा और मीडिया प्रभारी प्रवीण गुसाई सहित अनेक सदस्य शामिल हैं। इनमें विक्रम सिद्ध, बाबूलाल गोदारा, रामरतन गोदारा, महेश गोदारा, जगदीश गोदारा, मेघराज चौधरी, विनोद कुमार जाखड़, रामरतन, गोपालाराम, सुनील सिंह, सीताराम जाखड़, मनोज शर्मा, मालाराम राइका, हीरालाल सुथार, रामावतार, रामरतन, पुरबा राम, डूंगर नाथ, पवन शर्मा, बलवीर सिंह, रामनिवास जाखड़, राजेश मेघवाल, शरीफ भानू, अशोक भाम्भू, राजन मूंड, मांगू सिंह, डूंगरनाथ, भागीरथनाथ, सीताराम नाई, मुकेश माली, कैलाश कुमार स्वामी, सुशील गुरुवा, हीरालाल सुथार, फुसाराम मेघवाल जैसे कई सक्रिय सदस्य शामिल हैं।
ई-मित्र संचालकों के इस आंदोलन ने क्षेत्र में एक नई बहस को जन्म दिया है। अब देखना यह है कि प्रशासन इस स्थिति से कैसे निपटता है और ई-मित्र संचालकों की मांगों पर क्या प्रतिक्रिया देता है। यह घटनाक्रम निश्चित रूप से किसानों और आम नागरिकों को भी प्रभावित करेगा, जो इन सेवाओं पर निर्भर हैं।