इस मामले की पैरवी कर रहे एडवोकेट बजरंगलाल ज्याणी ने बताया कि अदालत ने डालूराम नामक व्यक्ति को कुशलाराम की हत्या का दोषी पाया है और उसे आजीवन कारावास की सजा सुनाई है।
घटना की पृष्ठभूमि में जाएं तो, लखासर निवासी मालाराम पुत्र पीरदान ने पुलिस को इस घटना की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। रिपोर्ट में उन्होंने कुशलाराम की हत्या का ज़िक्र किया था, जिसके बाद पुलिस ने जांच शुरू की और डालूराम को गिरफ्तार किया।
यह फैसला न्याय व्यवस्था में लोगों के विश्वास को और मजबूत करता है। यह दिखाता है कि कानून की नजर में सब बराबर हैं और अपराध करने वाला चाहे कोई भी हो, उसे अपने कर्मों का फल अवश्य मिलता है। यह घटना हमें याद दिलाती है कि जीवन कितना अनमोल है और हमें हमेशा शांति और सद्भाव बनाए रखने का प्रयास करना चाहिए।