श्रीडूंगरगढ़, 26 अक्टूबर, 2025। राज्य सरकार ने प्रशासनिक मशीनरी को और सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। एक बड़े फेरबदल में, 67 राजस्थान प्रशासनिक सेवा (RAS) के अधिकारियों का तबादला किया गया है। इस फेरबदल में 30 उपखंड अधिकारी (SDM) भी शामिल हैं, जिन्हें नई जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं। यह बदलाव प्रशासनिक गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है।
इस फेरबदल में शिक्षा विभाग पर विशेष ध्यान दिया गया है। गजेंद्र सिंह राठौड़ को माध्यमिक शिक्षा बोर्ड का नया सचिव बनाया गया है। वे कैलाश चंद शर्मा का स्थान लेंगे, जिन्हें अब दौसा जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) के रूप में नियुक्त किया गया है।
कर्मचारी चयन बोर्ड में भी बदलाव हुआ है, जहाँ दिनेश कुमार शर्मा को सचिव पद की जिम्मेदारी सौंपी गई है। वहीं, पूर्व सचिव भागचंद बाल को जयपुर विकास प्राधिकरण (JDA) में अतिरिक्त आयुक्त के पद पर भेजा गया है।
जोधपुर में भी कई महत्वपूर्ण बदलाव हुए हैं। भागीरथ बिश्नोई, जो पहले जोधपुर जेडीए के सचिव थे, अब एचसीएम रिपा जोधपुर में अपनी सेवाएं देंगे। सुनील भाटी को कॉलेज शिक्षा आयुक्तालय से वाणिज्यिक कर विभाग में उपायुक्त बनाया गया है। सिणधरी के एसडीएम समंदर सिंह भाटी को कृषि विश्वविद्यालय, जोधपुर के रजिस्ट्रार के रूप में नियुक्त किया गया है।
विश्वविद्यालयों और आयोगों में भी परिवर्तन देखने को मिले हैं। गुंजन सोनी, जो पहले जय नारायण व्यास विश्वविद्यालय, जोधपुर के रजिस्ट्रार थे, अब राजस्थान संस्कृत विश्वविद्यालय, जयपुर में रजिस्ट्रार का पदभार संभालेंगे। बृजमोहन नोगिया, जो कला एवं संस्कृति विभाग में उप सचिव थे, अब अल्पसंख्यक आयोग के सचिव के रूप में अपनी सेवाएं देंगे। नवीन यादव, जो डीएलबी में उप सचिव थे, उन्हें जोबनेर कृषि विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार पद पर नियुक्त किया गया है। डॉ. प्रीतो सिंह पंवार, जो सहायता विभाग में सचिव थे, अब देवनारायण बोर्ड के सचिव बनाए गए हैं।
इस प्रशासनिक फेरबदल के बीच, राज्य सरकार ने चार अधिकारियों के तबादले रद्द भी कर दिए हैं। इनमें नरेंद्र कुमार जैन-1, भूपेंद्र यादव, सुरेंद्र प्रसाद और अमित कुमार मीणा शामिल हैं। इन अधिकारियों को अब अपने पूर्व पद पर ही बने रहना होगा।
सूत्रों की मानें तो यह प्रशासनिक फेरबदल राज्य सरकार की प्रशासनिक दक्षता और पारदर्शिता को बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। अब देखना यह है कि इन परिवर्तनों से प्रशासन और आम जनता के बीच संबंधों में क्या बदलाव आते हैं और क्या ये बदलाव शासन व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बनाने में सहायक होते हैं। यह फेरबदल निश्चित रूप से आने वाले समय में राज्य के प्रशासनिक ढांचे को नई दिशा देगा।