श्रीडूंगरगढ़, 24 अक्टूबर 2025। ऊपनी गांव में आज एक नई सुबह का उदय हुआ। रामा श्यामा के इस पावन दिन पर, गांव के लोगों ने मिलकर कुछ ऐसे फैसले लिए जो आने वाले समय में इस गांव की तस्वीर बदल सकते हैं।
पहला और सबसे महत्वपूर्ण निर्णय रहा मृत्युभोज को बंद करने का। यह एक ऐसा रिवाज है, जो अक्सर परिवारों पर भारी आर्थिक बोझ डालता है। ग्रामीणों ने सर्वसम्मति से इस प्रथा को समाप्त करने का संकल्प लिया, ताकि किसी भी परिवार को दुःख की घड़ी में आर्थिक तंगी का सामना न करना पड़े।
इसके साथ ही, गांव में डीजे पर भी पूर्ण प्रतिबंध लगाने का निर्णय लिया गया। शोर-शराबे से दूर, शांतिपूर्ण माहौल बनाए रखने के उद्देश्य से यह कदम उठाया गया है।
इन सामाजिक बदलावों के बीच, गोदारा परिवार ने गांव के प्रति अपनी अटूट निष्ठा का परिचय दिया। दिवंगत भूराराम गोदारा के पुत्र बीरबल गोदारा ने गांव के हर वर्ग के हित में एक महत्वपूर्ण घोषणा की। उन्होंने गांव में पशु चिकित्सालय के निर्माण के लिए अपनी काश्त भूमि में से आधा बीघा जमीन दान करने का निर्णय लिया।
बीरबल गोदारा ने बताया कि गांव में पशु चिकित्सालय की आवश्यकता लंबे समय से महसूस की जा रही थी। इस जरूरत को देखते हुए, उन्होंने ग्रामीण हित में आबादी भूमि के निकट स्थित अपने खेत की जमीन में से आधा बीघा देने का फैसला किया।
ग्रामीणों ने इस उदार निर्णय की भूरि-भूरि प्रशंसा की और गोदारा परिवार के प्रति आभार व्यक्त किया। उनका मानना है कि यह दान गांव के पशुधन के लिए वरदान साबित होगा।
घोषणा के बाद, पंचायत में भूमि अधिग्रहण की कागजी कार्रवाई शुरू कर दी गई है। उम्मीद है कि जल्द ही पशु चिकित्सालय का निर्माण कार्य शुरू हो जाएगा, जो गांव के पशुओं के स्वास्थ्य और कल्याण के लिए एक महत्वपूर्ण कदम होगा।
ऊपनी गांव में आज जो बदलाव देखने को मिल रहे हैं, वे दिखाते हैं कि एकजुट होकर, सकारात्मक सोच के साथ, हम अपने समाज को बेहतर बना सकते हैं। यह गांव, बदलाव की एक ऐसी मिसाल कायम कर रहा है, जो दूसरों के लिए भी प्रेरणादायक है।