तिलोकचंद ने लोक प्रशासन (पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन) विषय में समूचे राजस्थान में 42वीं रैंक हासिल की है। इस प्रतिष्ठित परीक्षा में कुल 45 पद थे, और तिलोकचंद ने पहले ही प्रयास में यह असाधारण उपलब्धि प्राप्त कर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है।
यह सफलता इसलिए भी विशेष है क्योंकि तिलोकचंद ने श्रीडूंगरगढ़ में रहकर स्वयं अध्ययन के माध्यम से यह मुकाम हासिल किया है। उनकी इस यात्रा में सबसे बड़ा संबल उनके माता-पिता और गुरुजन रहे। उनके पिता, सोहनलाल, जो एक किसान हैं, ने सदैव अपने बेटे को आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया और हर संभव सहायता प्रदान की।
तिलोकचंद की कहानी उन सभी युवाओं के लिए प्रेरणा है जो सीमित संसाधनों के बावजूद अपने सपनों को साकार करने का हौसला रखते हैं। उनकी सफलता न केवल व्यक्तिगत है, बल्कि यह पूरे श्रीडूंगरगढ़ क्षेत्र के लिए एक उम्मीद की किरण है, जो दिखाती है कि लगन और मेहनत से किसी भी लक्ष्य को प्राप्त किया जा सकता है। तिलोकचंद का यह सफर एक मिसाल है, जो आने वाली पीढ़ियों को भी अपने सपनों को पूरा करने के लिए प्रेरित करता रहेगा।