आज, विक्रम संवत 2082, शक सम्वत 1947 विश्वावसु, काली सम्वत 5126, मास अमांत आश्विन और मास पूर्णिमांत कार्तिक का यह शुभ दिन है। शरद ऋतु की छटा बिखरी हुई है और सूर्योदय 6:35 पर हुआ।
आज का दिन पंचांग के महत्व को दर्शाता है। शास्त्रों में वर्णित है कि तिथि के पठन और श्रवण से माँ लक्ष्मी की कृपा मिलती है। वार के पठन और श्रवण से आयु में वृद्धि होती है। नक्षत्र के पठन और श्रवण से पापो का नाश होता है। योग के पठन और श्रवण से प्रियजनों का प्रेम मिलता है, उनसे वियोग नहीं होता है। करण के पठन श्रवण से सभी तरह की मनोकामनाओं की पूर्ति होती है। इसलिए हर मनुष्य को जीवन में शुभ फलों की प्राप्ति के लिए नित्य पंचांग को देखना, पढ़ना चाहिए।
आज द्वादशी तिथि दोपहर 12:20 तक रहेगी, नक्षत्र पूर्वा फाल्गुनी दोपहर 03:42 तक रहेगा। योग ब्रह्म रात 01:47 तक रहेगा।
आज का दिन धनतेरस की हार्दिक शुभकामनाओं से भी सुसज्जित है। मान्यता है कि विश्व में आरोग्य और चिकित्सा के प्रसार के लिए भगवान विष्णु ने धन्वंतरि जी के रूप में अवतार लिया था। आज के दिन धन्वन्तरि देव की पूजा करने और घर पर उनकी तस्वीर की स्थापना करने से आरोग्य की प्राप्ति होती है, समस्त रोगों से छुटकारा मिलता है। चूंकि धन्वंतरि जी अपने हाथ में अमृत का कलश लेकर प्रकट हुए थे, इसलिए धनतेरस के दिन भगवान को प्रसन्न करने के लिए पीतल का बर्तन खरीदा जाता है। यह भी मान्यता है कि इस दिन जिस चीज को भी खरीदा जाता है, उसमें तेरह गुणा बढ़ोतरी होती है।
धनतेरस के दिन भगवान कुबेर जी का भी पूर्ण श्रद्धा से पूजन करना अनिवार्य है। कुबेर जी धनाध्यक्ष हैं, संपत्ति प्रदान करने वाले हैं। इनकी सच्चे मन से पूजा करने से सुख, सौभाग्य और ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है।
पंचांग के अनुसार वर्ष 2025 में त्रयोदशी तिथि का प्रारम्भ 18 अक्टूबर शनिवार को दोपहर 12:20 बजे से होगा और त्रियोदशी तिथि 19 अक्टूबर रविवार को दोपहर 1:52 पर समाप्त होगी।
दीपावली के पांच दिनों तक दीपदान का आज से ही प्रारम्भ होता है। इस दिन से दीपावली के पांचों दिनों तक संध्या के समय घर के बाहरी मुख्य द्वार के दोनों ओर अनाज के ढेर पर मिटटी के दीपक को तेल से भर कर अवश्य ही जलाना चाहिए।
धनतेरस के दिन पीतल, सोना, चांदी, नवीन वस्त्र खरीदने का विधान है। दीपावली के दिन लक्ष्मी-गणेश जी की पूजा के लिए लक्ष्मी-गणेश जी की मूर्ति, खील, लावा, चीनी के खिलौने आज ही खरीदने चाहिए।
मान्यता है कि इस दिन विशेष रूप से सूखा खड़ा धनिया, पीली कौड़ियां, नमक, और झाड़ू अवश्य ही खरीद कर लाना चाहिए। इस दिन झाड़ू खरीदने के बाद उसे दीपावली के अगले दिन से प्रयोग में लाना चाहिए।
आज शनिवार है, और शनिवार के दिन प्रात: पीपल के पेड़ में दूध मिश्रित मीठे जल का अर्ध्य देने और सांय पीपल के नीचे तेल का दीपक जलाने से कुंडली की समस्त ग्रह बाधाओं का निवारण होता है। शनिवार के दिन पीपल के नीचे हनुमान चालीसा पढ़ने और गायत्री मन्त्र की एक माला का जाप करने से किसी भी तरह का भय नहीं रहता है, समस्त बिगड़े कार्य भी बनने लगते हैं।
शिवपुराण के अनुसार शनि देव पिप्लाद ऋषि का स्मरण करने वाले, उनके भक्तों को कभी भी पीड़ा नहीं देते हैं इसलिए जिन के ऊपर शनि की दशा चल रही हो उन्हें अवश्य ही न केवल शनिवार को वरन नित्य पिप्लाद ऋषि का स्मरण करना चाहिए। शनिवार के दिन पिप्पलाद श्लोक का या पिप्पलाद ऋषि जी के केवल इन तीन नामों (पिप्पलाद, गाधि, कौशिक) को जपने से शनि देव की कृपा मिलती है, शनि की पीड़ा निश्चय ही शांत हो जाती है।
पण्डित श्रीडूंगरगढ़ ONE की ओर से आप सभी को आज का दिन मंगलमय हो!