इसी क्रम में, बुधवार को गांव दुलचासर के पास कोटासर मार्ग स्थित रेलवे अंडरब्रिज के नज़दीक, बासी महियान, कालछा खेतों और दुलचासर रोही की ओर जाने वाले खेतों के रास्तों को बंद करने की प्रक्रिया शुरू की गई।
इस कार्रवाई की जानकारी मिलते ही स्थानीय ग्रामीणों में चिंता और असंतोष व्याप्त हो गया। बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर पहुंचे और उन्होंने इस कार्रवाई का विरोध जताया। ग्रामीणों का कहना था कि इन रास्तों के बंद होने से उनकी आवाजाही प्रभावित होगी और खेतों तक पहुंचना मुश्किल हो जाएगा।
ग्रामीणों के विरोध को देखते हुए, रेलवे अधिकारियों ने उन्हें कुछ समय देने का आश्वासन दिया। इसके बाद, ग्रामीणों ने सामूहिक रूप से बीकानेर जाकर रेलवे अधिकारियों से इस विषय पर बातचीत करने का निर्णय लिया।
आज, ग्रामीणों का एक प्रतिनिधिमंडल बीकानेर में रेलवे मंडल प्रबंधक से मिलकर अपनी बात रखेगा। वे रेलवे अधिकारियों को अपनी समस्याओं से अवगत कराएंगे और समाधान निकालने का प्रयास करेंगे।
सूत्रों की मानें तो, कोलायत में हाल ही में हुई ट्रेन के डिब्बे उतरने की घटना के बाद रेलवे प्रशासन सतर्क हो गया है। रेलवे अपने कानूनी प्रावधानों को सख्ती से लागू करने की दिशा में प्रयासरत है।
खबर है कि रेलवे ट्रैक के आसपास 70 फीट तक के क्षेत्र को खाली कराने की योजना है। इस कवायद का उद्देश्य हाई स्पीड ट्रेनों सहित सभी ट्रेनों और यात्रियों की सुरक्षा को सुनिश्चित करना है। रेलवे का मानना है कि इससे ट्रैक की निगरानी और रखरखाव में भी सुविधा होगी।
अब देखना यह है कि रेलवे प्रशासन और ग्रामीणों के बीच इस मुद्दे पर क्या सहमति बनती है और किस तरह से आमजन की ज़रूरतों और सुरक्षा के बीच संतुलन स्थापित किया जाता है। यह मामला निश्चित रूप से सोचने पर विवश करता है कि विकास और आम जीवन की ज़रूरतों में कैसे सामंजस्य स्थापित किया जाए।