यह संचलन मोमासर के भोमियाजी महाराज मंदिर से प्रारंभ हुआ। ध्वज पताकाओं और भारत माता की जय के नारों के साथ, स्वयंसेवकों की अनुशासित पंक्तियाँ आगे बढ़ीं। संचलन का मार्ग हनुमान धोरा, तेरापंथ भवन मार्ग, पंचायत भवन, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र और शिवालय बास से होकर गुज़रा, और अंत में यह भोमियाजी मंदिर परिसर में आकर संपन्न हुआ।
पथ संचलन में लगभग 200 स्वयंसेवकों ने पूर्ण गणवेश में भाग लिया। उनकी कदमताल और अनुशासन ने दर्शकों को प्रभावित किया। पूरे मार्ग में ग्रामीणों ने अपने घरों के सामने रंगोलियाँ सजाईं और पुष्पवर्षा कर स्वयंसेवकों का स्वागत किया। यह दृश्य एकता और सद्भाव का प्रतीक था, जो समाज में गहरी पैठ बनाए हुए है।
विजयादशमी के पावन अवसर पर मंदिर परिसर में शस्त्र पूजन भी किया गया। यह परंपरा शक्ति और शौर्य के प्रति सम्मान का प्रतीक है। इस अवसर पर विभाग कार्यवाह प्रदीप, खंड चालक शिवराज सिंह राजपुरोहित और मुख्य अतिथि अशोक पटावरी उपस्थित थे।
विभाग कार्यवाह प्रदीप ने अपने संबोधन में कहा कि “संगे शक्ति कलियुगे युक्ति” अर्थात कलियुग में संगठन में ही शक्ति है। उन्होंने इस सिद्धांत पर बल देते हुए कहा कि यदि हम संगठित रहें तो भारत पुनः विश्व गुरु बन सकता है। उनका यह कथन श्रोताओं में नई ऊर्जा का संचार कर गया।
कार्यक्रम में वरिष्ठ स्वयंसेवक धनराज नाई, मदन लाल सोनी, उपसरपंच जुगराज संचेती, व्यापार मंडल अध्यक्ष मनोज संचेती सहित बड़ी संख्या में ग्रामीणजन उपस्थित थे। सभी ने मिलकर इस आयोजन को सफल बनाया और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष की ओर एक मजबूत कदम बढ़ाया। यह आयोजन न केवल संगठन की शक्ति का प्रदर्शन था, बल्कि समाज में एकता और सद्भाव के महत्व को भी रेखांकित करता है।