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साहित्यकार का कालदृष्टा होना ही उसे कालजयी बनाता है : रवि पुरोहित

समारोह के दूसरे दिन, रविवार को लक्ष्मीनारायण रंगा सृजन सदन में ‘काव्य रंगत’ कार्यक्रम आयोजित किया गया। शहर के कवि और शायर, हिंदी, उर्दू और राजस्थानी भाषाओं में काव्य पाठ करने के लिए एकत्र हुए, ताकि दिवंगत रचनाकार को अपनी श्रद्धांजलि अर्पित कर सकें। इस कार्यक्रम में तीन पीढ़ियों के कवियों ने भाग लिया, जो इस बात का प्रमाण है कि रंगा जी का प्रभाव समय की सीमाओं से परे है।

वरिष्ठ कवि और संपादक रवि पुरोहित, जो इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि थे, ने साहित्य के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि एक साहित्यकार को संवेदनशील और भविष्य का द्रष्टा होना चाहिए, अन्यथा समय और समाज उसे भुला देते हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि जो लेखक भविष्य की संभावनाओं को अपने लेखन में समाहित करते हैं, वही कालजयी बनते हैं। पुरोहित जी ने पत्रकारिता और साहित्य के बीच के अंतर को भी स्पष्ट किया, यह बताते हुए कि सच्चा साहित्यकार भविष्य की चुनौतियों और मूल्यों को अपने लेखन में दर्शाता है।

समारोह की अध्यक्षता कर रहे वरिष्ठ शायर जाकिर अदीब ने लक्ष्मीनारायण रंगा के साहित्य को मानवीय चेतना का सशक्त पैरोकार बताया। उन्होंने कहा कि रंगा जी ने साहित्य की लगभग सभी विधाओं में लेखन करके एक अद्भुत उदाहरण स्थापित किया है। अदीब जी ने इस तरह के आयोजनों के महत्व पर भी प्रकाश डाला, यह कहते हुए कि वे शहर की साहित्यिक परंपरा को नई ऊर्जा प्रदान करते हैं।

वरिष्ठ साहित्यकार कमल रंगा ने कहा कि रंगा जी की रचनाएँ अनुभव, अनुभूति और संवेदनाओं की सच्ची अभिव्यक्ति हैं। उन्होंने बताया कि रंगा जी का सृजन नवबोध, नवसंदर्भ और समसामयिक विषयों पर आधारित रहा है।

‘काव्य रंगत’ में जाकिर अदीब, रवि पुरोहित, कमल रंगा, प्रमोद शर्मा, डॉ. गौरीशंकर प्रजापत, मनीषा आर्य सोनी, डॉ. कृष्णा आचार्य, पुनीत रंगा, कासिम बीकानेरी, सुमित रंगा, मधुरिमा सिंह, सागर सिद्दकी, कैलाश टाक, इन्द्रा व्यास, गिरिराज पारीक, गंगाबिशन बिश्नोई, हरि किशन व्यास, पीतांबर सोनी, अब्दुल शकूर सहित अनेक कवियों ने भाग लिया।

कार्यक्रम का कुशलतापूर्वक संचालन वरिष्ठ शायर कासिम बीकानेरी ने किया। गिरिराज पारीक ने अतिथियों का स्वागत किया, और वरिष्ठ शिक्षाविद् राजेश रंगा ने सभी के प्रति आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर डॉ. अजय जोशी, आत्माराम भाटी, महेंद्र जोशी, बी.एल. नवीन, डॉ. फारूख चौहान, घनश्याम सिंह, डॉ. तुलसीराम मोदी, शिवप्रकाश शर्मा, आशीष रंगा सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे। सभी ने रंगा जी के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर उनके साहित्य को नमन किया।

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