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पूर्व सरपंच मेघराज चोटिया की हत्या के मामले में आज बड़ी संख्या में ग्रामीण पहुंचे थाने, की पुलिस से ये मांग…

गाँव धीरदेसर चोटियान में पूर्व सरपंच मेघराज चोटिया की हत्या के मामले ने आज एक नया मोड़ ले लिया। बड़ी संख्या में ग्रामीण थाने पर एकत्रित हुए और पुलिस से आग्रह किया कि इस हत्याकांड में शामिल अन्य आरोपियों को भी न्याय के कटघरे में लाया जाए।

ग्रामीणों ने थानाधिकारी को एक पत्र सौंपा, जिसमें उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि मुख्य आरोपी के साथ-साथ षड्यंत्र में शामिल लोगों को भी रिहा न किया जाए। ग्रामीणों का कहना था कि इन षड्यंत्रकारियों ने ही हत्यारे को हथियार मुहैया कराया था और हत्या से पहले, उसी रात, वे भी मृतक के साथ अभद्र व्यवहार कर रहे थे।

ग्रामीणों ने गाँव में बढ़ते अपराधों पर गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने बताया कि जिन लोगों पर आरोप हैं, वे गाँव के जाने-माने अपराधी हैं और आए दिन छोटी-बड़ी आपराधिक घटनाओं को अंजाम देते रहते हैं। ग्रामीणों के अनुसार, हत्या से पहले इन आरोपियों ने हनुमानाराम को भी जान से मारने की धमकी दी थी। साथ ही, मृतक मेघराज का रुपयों से भरा बैग भी गायब मिला है, और हत्यारा आदतन चोर बताया जा रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि पुलिस द्वारा इस मामले में उचित कार्रवाई नहीं की गई है।

ग्रामीणों ने आशंका जताई कि यदि इन अपराधियों को छोड़ दिया गया तो गाँव में चोरी, मारपीट और महिलाओं के साथ अभद्र व्यवहार जैसी घटनाओं में वृद्धि हो सकती है। उन्होंने यह भी बताया कि वे गाँव में नशामुक्ति के लिए लगातार प्रयास कर रहे हैं, और पिछले 402 दिनों से अवैध शराब की बिक्री के खिलाफ धरना दे रहे हैं, लेकिन उनकी सुनवाई नहीं हो रही है।

इस अवसर पर, सरपंच रामचंद्र चोटिया, पूर्व सरपंच बजरंग लाल चोटिया, पूर्व सरपंच प्रतिनिधि तिलोकाराम, पूर्व सरपंच प्रतिनिधि नारायणराम कमलिया, एडवोकेट श्यामसुंदर आर्य, तेजाराम बारोटिया, गजानंद शर्मा, एडवोकेट गोपीराम जान्दू, सेराराम चोटिया, भंवरलाल चोटिया, राहुल बारोटिया, तेजाराम बारोटिया, ताजाराम बारोटिया, त्रिलोकाराम चोटिया, मोटाराम चोटिया, गोपीराम चोटिया, सीताराम चोटिया, मोहन चोटिया, केशराराम चोटिया, मूलाराम चोटिया, भैराराम चोटिया, लक्षमण सिंह राजपूत, मोहनराम नाई सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित थे।

यह घटनाक्रम न केवल एक हत्या के मामले की जटिलताओं को उजागर करता है, बल्कि गाँव में व्याप्त सामाजिक और आर्थिक तनावों की ओर भी इशारा करता है। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि पुलिस इस मामले में आगे क्या कार्रवाई करती है और गाँव में शांति और न्याय की स्थापना के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।

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