पंजाब, हरियाणा और राजस्थान के विभिन्न हिस्सों से, विशेषकर बीकानेर जिले से, बड़ी संख्या में श्रद्धालु बाबा भैरव के दर्शनों के लिए पहुंचे। मंदिर में माथा टेकने और धोक लगाने के लिए भक्तों का तांता लगा रहा। इस दौरान, वाहनों की लंबी कतारों और भीड़ के कारण यातायात व्यवस्था बुरी तरह चरमरा गई, जिससे श्रद्धालुओं और स्थानीय ग्रामीणों को भारी असुविधा का सामना करना पड़ा।
इसी भीड़भाड़ का फायदा उठाकर, श्रीडूंगरगढ़ निवासी सत्यनारायण सोनी की मोटरसाइकिल बस स्टैंड के पास से चोरी हो गई। सोनी ने दो दिन तक अपनी बाइक की तलाश की, लेकिन जब वह नहीं मिली तो उन्होंने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है।
इस सबके बीच, मेले में प्रशासनिक व्यवस्था की कमी को लेकर ग्रामीणों में गहरा आक्रोश है।
सूत्रों के अनुसार, मंदिर में पूर्व में हुए एक विवादित मूर्ति प्रकरण के बाद से मंदिर की व्यवस्था प्रशासन के जिम्मे है। सरपंच प्रतिनिधि गिरधारीसिंह राजपुरोहित ने इस बात पर कड़ी नाराजगी जताई कि इसके बावजूद मेले के दौरान प्रशासन द्वारा किसी भी प्रकार की व्यवस्था नहीं की गई। उन्होंने बताया कि पुलिस और प्रशासन से मेले में व्यवस्था बनाए रखने और पुलिस कर्मियों की तैनाती का आग्रह किया गया था, लेकिन उनकी बात पर कोई ध्यान नहीं दिया गया।
राजपुरोहित ने कहा कि व्यवस्था केवल जागरूक युवाओं के भरोसे ही थी, जिन्होंने अपने स्तर पर प्रयास किए। ग्रामीणों ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि तोलियासर मेले में आपराधिक घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। उन्होंने याद दिलाया कि पिछले वर्षों में यहां हत्या, लूट और सड़क दुर्घटनाओं जैसी दुखद घटनाएं हुई हैं। पिछले मेले में भी चेन स्नेचिंग में लिप्त एक महिला गिरोह को पुलिस ने पकड़ा था।
ग्रामीणों का मानना है कि ऐसे में पुलिस और प्रशासन की अनदेखी नागरिक सुरक्षा और व्यवस्था के लिए उचित नहीं है, और यह लापरवाही भविष्य में और भी गंभीर परिणाम ला सकती है। मेले में उमड़ी आस्था और प्रशासनिक उदासीनता के बीच, यह सवाल उठता है कि क्या भविष्य में इस प्रसिद्ध धार्मिक आयोजन को और अधिक सुरक्षित और सुव्यवस्थित बनाया जा सकेगा?