मालू भवन आज एक विशेष अवसर का साक्षी बना, जब अणुव्रत सप्ताह के अंतर्गत अनुशासन दिवस मनाया गया। साध्वी संगीतश्री जी ने अपने ओजस्वी उद्बोधन में अनुशासन को जीवन का सार बताया। उन्होंने कहा कि जो व्यक्ति अनुशासन के मार्ग पर चलता है, वही सही मायने में सफलता प्राप्त करता है। आचार्य महाश्रमण जी के अनुशासन के संदेश को जन-जन तक पहुंचाने के प्रयासों को उन्होंने सराहा।
साध्वी डॉ. परमप्रभा जी ने भी प्रेरणादायक शब्दों से श्रोताओं को आलोकित किया। उन्होंने कहा कि जीवन में अनुशासन को अपनाकर कोई भी व्यक्ति उन्नति के शिखर पर पहुंच सकता है। दोनों साध्वियों ने विभिन्न कथाओं के माध्यम से अनुशासन के महत्व को सरलता से समझाया।
कार्यक्रम की शुरुआत नवकार महामंत्र के जाप से हुई, जिससे वातावरण भक्तिमय हो गया। तुलसीराम चौरड़िया, विजयराज सेठिया, चमन श्रीमाल और विजयराज सेवग जैसे प्रबुद्ध वक्ताओं ने अनुशासन के विभिन्न पहलुओं पर अपने विचार रखे। संस्कार इनोवेटिव पब्लिक स्कूल और ब्राइट फ्यूचर स्कूल के विद्यार्थियों ने भी कार्यक्रम में भाग लिया और अनुशासन के संदेश को आत्मसात करने का संकल्प लिया।
कार्यक्रम का सफल आयोजन समिति अध्यक्ष सुमति पारख, प्रभारी तुलसीराम चौरड़िया और सहप्रभारी के.एल. जैन के नेतृत्व में हुआ। उपाध्यक्ष सत्यनारायण स्वामी ने सभी का आभार व्यक्त किया। विमल भाटी, लालसिंह कंपाउंडर, छगन प्रजापत, कांतिप्रसाद दर्जी, मनीष लोहिया, मीनाक्षी, गोविंदराम सिंघी, चौथमल कोठारी, त्रिलोकचंद हीरावत, महेंद्र मालू, विमल भाटी, शुभकरण पारीक, संजय पारीक, विशाल स्वामी, मुकेश स्वामी, अशोक झाबक, अशोक बैद सहित अनेक गणमान्य नागरिक इस अवसर पर उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन चमन श्रीमाल ने कुशलतापूर्वक किया।
सोमवार को अपर सेशन न्यायाधीश सरिता नौशाद ने एक महत्वपूर्ण फैसले में हत्या के आरोपी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। सुरजनसर निवासी लालाराम उर्फ लालचंद पुत्र गोविंदराम को नानूराम की हत्या के आरोप में दोषी पाया गया। न्यायाधीश नौशाद ने उसे आजीवन कारावास और 30 हजार रुपए के अर्थदंड की सजा सुनाई।
मृतक के भाई भोजाराम ने 11 अक्टूबर 2022 को थाने में मामला दर्ज करवाया था। पुलिस की त्वरित जांच और मजबूत चार्जशीट ने आरोपी को सजा दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
6 अक्टूबर, 2025 को प्रज्ञालय संस्थान और राजस्थानी युवा लेखक संघ ने मिलकर एक अभिनव पहल की। उन्होंने पुस्तकालोचन कार्यक्रम का आयोजन किया, जिसमें श्रीडूंगरगढ़ के साहित्यकार रवि पुरोहित के काव्य संग्रह ‘आग अभी शेष है’ पर चर्चा की गई। यह कार्यक्रम बीकानेर के लक्ष्मीनारायण रंगा सृजन सदन में आयोजित किया गया।
वरिष्ठ साहित्यकार कमल रंगा, जो कार्यक्रम के अध्यक्ष थे, ने रवि पुरोहित की कविताओं को प्रकृति और मानवीय भावनाओं के प्रति पाठकों में प्रेम जगाने वाली बताया। उन्होंने कहा कि आज के कठिन समय में ये कविताएं समाज में मानवीय मूल्यों और रिश्तों की मिठास बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। रंगा ने कवि पुरोहित की भाषा की भी प्रशंसा की।
मुख्य अतिथि डॉ. उमाकांत गुप्त ने कविताओं को समय की धड़कन से जुड़ने वाली और सच्चाई को उजागर करने वाली बताया। मोनिका गौड़ ने संग्रह को प्रकृति से प्रेम करने वाली कविताओं का खजाना बताया। कासिम बीकानेरी ने कविताओं को विभिन्न विषयों पर गहरी अनुभूति व्यक्त करने वाली कहा। जुगल किशोर पुरोहित ने कविताओं को वर्तमान समय की स्थितियों और परिस्थितियों को दर्शाने वाली बताया।
कवि रवि पुरोहित ने अपनी कविता के रचनात्मक तरीके के बारे में बात की। उन्होंने कहा कि कविता के निर्माण में भाव, भाषा, संवेदना, शिल्प, अर्थ, सामाजिक सरोकार और कहने का सलीका मिलकर काम करते हैं। जाकिर अदीब ने प्रज्ञालय संस्थान के योगदान को सराहा और पुस्तकालोचन के महत्व को बताया।
कार्यक्रम में बुलाकी शर्मा, राजेन्द्र जोशी, गिरिराज पारीक, सरोज शर्मा, गोविन्द जोशी, संगीता ओझा, गोपाल कुमार व्यास ‘कुण्ठित’, गुलजार बानो, महेन्द्र जोशी, कृष्णचंद पुरोहित, डॉ. अजय जोशी, राजेश रंगा, विप्लव व्यास, डॉ. फारूक चौहान, भवानी सिंह, अशोक शर्मा, तोलाराम सारण, घनश्याम ओझा, कार्तिक मोदी सहित अनेक साहित्यकारों ने भाग लिया। कवि गिरीराज पारीक ने कार्यक्रम का संचालन किया और मो. फारूक चौहान ने सभी का धन्यवाद किया।
श्रीडूंगरगढ़ में 684 दिव्यांगजन अभी भी यूनिक डिसेबिलिटी आईडी (यूडीआईडी) कार्ड से वंचित हैं। जिले के 4 हजार 761 दिव्यांगजनों के लिए यूडीआईडी कार्ड बनवाने के लिए पीबीएम अस्पताल में विशेष शिविर शुरू हो गया है।
जिला कलक्टर श्रीमती नम्रता वृष्णि के निर्देश पर आयोजित इस शिविर में दिव्यांगों के यूडीआईडी कार्ड बनाने के लिए मेडिकल बोर्ड का गठन किया गया है। शिविर प्रतिदिन सुबह 9 बजे से दोपहर 3 बजे तक चलेगा।
यूडीआईडी कार्ड बनवाने के लिए दिव्यांगों को ईमित्र पर किए गए आवेदन या रजिस्ट्रेशन की प्रति या आधार कार्ड साथ ले जाना होगा। स्वावलम्बन पोर्टल के अनुसार, जिले में यूडीआईडी कार्ड से वंचित दिव्यांगों में बीकानेर शहरी और ग्रामीण क्षेत्र के 1 हजार 462, लूणकरणसर के 561, कोलायत के 496, खाजूवाला के 644, नोखा के 914 और श्रीडूंगरगढ़ के 684 दिव्यांग शामिल हैं।