कार्यक्रम की शुरुआत साध्वी संगीतश्री के नवकार महामंत्र के साथ हुई, जिसके बाद उपस्थित लोगों ने एक घंटे का ध्यान और त्याग का अभ्यास किया। वातावरण भक्ति और समर्पण से ओतप्रोत था।
अणुव्रत समिति की टीम ने मधुर मंगलाचरण गीत प्रस्तुत कर कार्यक्रम को गति दी। साध्वी डॉ. परमप्रभा ने बच्चों को एक मनोरंजक कहानी के माध्यम से अनुशासन के महत्व को समझाया। उनकी कहानी ने बच्चों के मन पर गहरा प्रभाव डाला। साध्वी संगीतश्री ने आचार्य भिक्षु से लेकर वर्तमान आचार्य महाश्रमण तक, अनुशासन के संदेश को जन-जन तक पहुंचाने के प्रयासों को रेखांकित किया। उन्होंने बल देते हुए कहा कि अनुशासन को आत्मसात करने वाला व्यक्ति ही जीवन में सफलता की ऊंचाइयों को छू सकता है।
इस अवसर पर तेरापंथी सभा से प्रमुख वक्ता विजयराज सेठिया, तेयुप से चमन श्रीमाल और शिक्षाविद विजयराज सेवग ने अनुशासन के विभिन्न पहलुओं पर अपने विचार व्यक्त किए। वक्ताओं ने अनुशासन को जीवन का आधार बताते हुए इसे सफलता की कुंजी बताया।
संस्कार इनोवेटिव पब्लिक स्कूल और ब्राइट फ्यूचर स्कूल के विद्यार्थियों ने कार्यक्रम में सक्रिय रूप से भाग लिया और अनुशासन को अपने जीवन में अपनाने का संकल्प लिया। इन युवाओं में अनुशासन के प्रति जागरूकता देखकर भविष्य के प्रति उम्मीद जगती है।
कार्यक्रम का कुशल संचालन समिति अध्यक्ष सुमति पारख, प्रभारी तुलसीराम चौरड़िया और सहप्रभारी के. एल. जैन ने किया। उनके कुशल नेतृत्व में कार्यक्रम सुचारू रूप से संपन्न हुआ।
अणुव्रत समिति के उपाध्यक्ष सत्यनारायण स्वामी ने कार्यक्रम में उपस्थित विद्यार्थियों, शिक्षकों, पत्रकारों और समाजजनों के प्रति आभार व्यक्त किया।
कार्यक्रम में विमल कुमार भाटी, लाल सिंह कंपाउंडर, छगन प्रजापत, कांति प्रसाद दर्जी, मनीष लोहिया, मीनाक्षी, गोविंदराम सिंघी, चौथमल कोठारी, त्रिलोकचंद हीरावत, महेंद्र मालू, विमल भाटी, शुभकरण पारीक, मुकेश स्वामी, अशोक झाबक, अशोक बैद सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।
अणुव्रत सप्ताह का समापन कल “जीवन विज्ञान दिवस” के साथ होगा, जिसका आयोजन मालू भवन में किया जाएगा। यह देखना दिलचस्प होगा कि जीवन विज्ञान दिवस के माध्यम से जीवन को बेहतर बनाने के लिए क्या संदेश दिया जाता है।