इस योजना के अंतर्गत प्रदेश के लगभग 20,250 सीनियर सेकेंडरी स्कूलों को शामिल किया गया है। हालांकि, यह योजना केवल उन्हीं विद्यालयों में लागू होगी जिनके पास विद्यार्थी विकास कोष में पर्याप्त धनराशि उपलब्ध है। ऐसे स्कूलों को दीपावली से पूर्व अपने भवनों की मरम्मत और रंगाई-पुताई का कार्य पूर्ण करने के निर्देश दिए गए हैं।
विद्यालयों को अपनी आवश्यकतानुसार ₹15,000 से ₹2,00,000 तक की राशि विद्यार्थी विकास कोष से खर्च करने की अनुमति दी गई है। विभाग ने इस बात पर विशेष बल दिया है कि यह कार्य राजस्थान लोक उपापन पारदर्शिता अधिनियम 2012, नियम 2013 और सामान्य वित्तीय एवं लेखा नियमों के अनुरूप ही किया जाए, ताकि पारदर्शिता और जवाबदेही बनी रहे।
सौंदर्यीकरण के लिए शिक्षा निदेशालय ने एक समान रंग संयोजन निर्धारित किया है। स्कूलों की दीवारें, नाम पट्ट, गेट और मुखमंडल (फ्रंट फसाड) एक विशेष रंग योजना में रंगे जाएंगे। इस कार्य को सर्वोच्च प्राथमिकता देने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि दीपावली से पहले सभी स्कूलों में यह कार्य संपन्न हो सके।
यह पहला अवसर है जब दीपावली जैसे पावन पर्व से पहले सरकारी स्कूलों में इस प्रकार के सौंदर्यीकरण का आदेश जारी किया गया है। यद्यपि, स्कूलों में समय-समय पर मरम्मत और सफाई का कार्य होता रहता है, लेकिन दीपावली के विशेष अवसर पर रंग-रोगन का यह अभियान अपने आप में अनूठा है। शिक्षा विभाग का मानना है कि जिस प्रकार दीपावली पर घर-आंगन सजते हैं, उसी प्रकार सरकारी स्कूल भी स्वच्छ, सुंदर और आकर्षक दिखने चाहिए।
जानकारों के अनुसार हर सरकारी स्कूल में छात्रों से ली जाने वाली विभिन्न फीस जैसे प्रवेश शुल्क, ट्रांसफर सर्टिफिकेट शुल्क, परीक्षा शुल्क आदि, विद्यार्थी विकास कोष में जमा की जाती हैं। इस कोष का उपयोग स्कूल की सफाई, रंगाई-पुताई, मरम्मत और अन्य छोटे विकास कार्यों में किया जाता है। अब इसी कोष से दीपावली से पहले विद्यालयों को सजाने और सुंदर बनाने का कार्य किया जाएगा।
शिक्षा विभाग का लक्ष्य है कि दीपावली से पहले सभी चयनित स्कूलों में यह कार्य पूर्ण हो जाए। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य सरकारी स्कूलों की छवि को बेहतर बनाना, विद्यार्थियों और अभिभावकों में गर्व और अपनत्व की भावना को जागृत करना, और स्वच्छता के प्रति जागरूकता का संदेश फैलाना है। यह पहल “स्वच्छ विद्यालय – सुंदर विद्यालय” की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। इस प्रयास से उम्मीद है कि विद्यार्थियों को एक सकारात्मक और प्रेरणादायक वातावरण मिलेगा, जिससे वे बेहतर शिक्षा प्राप्त कर सकेंगे।