“नशा नाश का द्वार है…” यह बात एक बार फिर ग्राम धीरदेसर चोटियान में गूंजी, जहाँ अणुव्रत समिति, श्रीडूंगरगढ़ ने नशामुक्ति दिवस के अवसर पर एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया। सामाजिक कार्यकर्ता और नशामुक्ति के लिए सतत प्रयासरत एडवोकेट श्यामसुंदर आर्य ने इस अवसर पर अपने अनुभवों को साझा करते हुए कहा कि उन्होंने अपने जीवन में कई घरों और परिवारों को नशे की भेंट चढ़ते देखा है। उन्होंने धीरदेसर चोटियान को नशामुक्त बनाने के लिए ग्रामीणों के संघर्ष को सराहा और इसे जारी रखने का आह्वान किया।
आर्य ने कहा कि धैर्य और दृढ़ संकल्प से सब कुछ संभव है, और नशा छोड़ने की शुरुआत भी इन्हीं गुणों से होती है। उन्होंने अणुव्रत संकल्पों की व्याख्या करते हुए कहा कि समाज में बदलाव की शुरुआत व्यक्ति को स्वयं से करनी चाहिए।
समिति अध्यक्ष सुमति पारख के मार्गदर्शन में आयोजित इस कार्यक्रम में उपस्थित सभी सदस्यों ने नशामुक्त समाज के निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने का संकल्प लिया।
कार्यक्रम से पहले, साध्वी संगीतश्री जी एवं डॉ. साध्वी परमप्रभा जी ने भी सभी को नशामुक्त जीवन अपनाने का संदेश दिया। आगंतुकों को मंगल पाठ भी सुनाया गया, जिससे वातावरण में सकारात्मकता का संचार हुआ।
कार्यक्रम प्रभारी विक्रम मालू और सह प्रभारी विशाल स्वामी के नेतृत्व में समिति की टीम ने धीरदेसर चोटियान गांव में जनजागरण किया और लोगों को नशामुक्ति संकल्प पत्र वितरित किए। इस दौरान समिति उपाध्यक्ष सत्यनारायण स्वामी, शुभकरण पारीक, के.एल. जैन, अशोक झाबक, मुकेश स्वामी, दिपांशु तातेड़, चमन श्रीमाल, हेमंत पारीक, आलोक मालू सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित थे। पूर्व सरपंच तिलोकाराम मेघवाल और प्रभुराम चोटिया सहित कई सामाजिक कार्यकर्ताओं और ग्रामीणों ने भी इस कार्यक्रम में भाग लिया।
यह कार्यक्रम न केवल नशामुक्ति के प्रति जागरूकता बढ़ाने का एक प्रयास था, बल्कि एक ऐसा मंच भी था जहाँ लोग एक साथ आकर समाज को बेहतर बनाने का संकल्प ले रहे थे।