श्रीडूंगरगढ़, 5 अक्टूबर, 2025। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) अपने शताब्दी वर्ष की ओर अग्रसर है और इस उपलक्ष्य में पूरे क्षेत्र में विजयदशमी उत्सव का आयोजन बड़े ही उत्साह और श्रद्धा के साथ किया जा रहा है। शनिवार को हेमासर, पूनरासर और आडसर बास मंडलों में आयोजित कार्यक्रमों में स्वयंसेवकों के साथ-साथ बड़ी संख्या में समाजबंधु और भगिनियों ने भाग लिया। यह उत्सव न केवल शस्त्र पूजन और पथ संचलन का मंच बना, बल्कि सामाजिक चिंतन और संगठन के लक्ष्यों पर भी प्रकाश डाला गया।
हेमासर मंडल, जिसमें बेनीसर, भोजास, लखासर, हेमासर और गजपुरा जैसे गांव शामिल हैं, का विजयदशमी उत्सव बेनीसर गांव में आयोजित किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत पारंपरिक शस्त्र पूजन से हुई, जो हमारी संस्कृति में शक्ति और शौर्य के प्रतीक के रूप में महत्वपूर्ण है।
बीकानेर विभाग के कार्यवाह प्रदीप कुमार ने मुख्य बौद्धिककर्ता के रूप में उपस्थित होकर स्वयंसेवकों को संबोधित किया। उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की विकास यात्रा पर प्रकाश डाला, जिसमें उपहास और विरोध के दौर से गुजरते हुए सामाजिक स्वीकृति प्राप्त करने तक की बातें शामिल थीं। उन्होंने पंच परिवर्तन, आगामी गृह संपर्क अभियान (1 से 16 नवंबर) और हिंदू सम्मेलन (20 जनवरी से 10 फरवरी) के उद्देश्यों और कार्यक्रमों की जानकारी दी, जो समाज को एकजुट करने और सकारात्मक बदलाव लाने के लिए संघ की प्रतिबद्धता को दर्शाते हैं।
पूनरासर मंडल (मनकरासर, राजपुरा, समंदसर, पूनरासर) का उत्सव पूनरासर गांव में आयोजित किया गया। मोमासर खंड कार्यवाह ओमप्रकाश लखारा ने बौद्धिक सत्र में अपने विचार व्यक्त किए, जो युवाओं को राष्ट्र और समाज के प्रति अपने कर्तव्यों के प्रति जागरूक करने का एक प्रयास था। कार्यक्रम की अध्यक्षता रामनाथ जाखड़ ने की। पथ संचलन के दौरान जगह-जगह पुष्पवर्षा कर स्वयंसेवकों का स्वागत किया गया, जो समाज में उनके प्रति सम्मान और स्नेह का प्रतीक था।
आडसर बास बस्ती का उत्सव आदर्श विद्या मंदिर में हुआ। बीकानेर विभाग कुटुंब प्रबोधन गतिविधि प्रमुख गंगासिंह ने बौद्धिक सत्र को संबोधित किया। उन्होंने समाज में संघ के बढ़ते प्रभाव और संगठन की भूमिका पर चर्चा की, जिससे स्पष्ट होता है कि संघ समाज को संगठित करने और सकारात्मक दिशा में ले जाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
हर स्थान पर उत्सव के दौरान शस्त्र पूजन, संघ गीत, प्रार्थना और बौद्धिक सत्र के साथ पथ संचलन निकाला गया। ग्रामीणों ने भी उत्सव में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया, जो इस बात का प्रमाण है कि संघ की विचारधारा समाज के हर वर्ग तक पहुंच रही है और लोगों को प्रेरित कर रही है।
इसी क्रम में रविवार को जाखासर मंडल का विजयदशमी उत्सव जाखासर गांव में, लिखमादेसर मंडल का लिखमादेसर गांव में तथा सेरूणा मंडल का सेरूणा गांव में आयोजित किया जाएगा।
इन कार्यक्रमों से यह स्पष्ट होता है कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ न केवल एक संगठन है, बल्कि यह समाज को एकजुट करने, संस्कृति को बढ़ावा देने और राष्ट्र के प्रति समर्पण की भावना को जागृत करने का एक आंदोलन है। विजयदशमी उत्सव जैसे आयोजन इस दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं।