श्रीडूंगरगढ़, 4 अक्टूबर 2025: किसान केसरी के नाम से लोकप्रिय रामेश्वर लाल डूडी ने अंतिम सांस ली। श्रीडूंगरगढ़ स्थित अपने निवास पर उन्होंने देर रात देह त्याग दी। वे लंबे समय से अस्वस्थ थे और पिछले चौदह महीनों से कोमा में थे।
रामेश्वर डूडी, जिन्होंने श्रीडूंगरगढ़ अंचल के जनमानस पर गहरा प्रभाव डाला, के निधन से क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई है। लोग नम आंखों से उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित कर रहे हैं।
1 जुलाई 1963 को जन्मे रामेश्वर डूडी ने अपने जीवन में कई राजनीतिक ऊंचाइयों को छुआ। उन्होंने छात्र राजनीति से अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत की और फिर कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा।
1995 से 1999 तक उन्होंने नोखा के प्रधान के रूप में कार्य किया। इसके बाद, 1999 से 2004 तक बीकानेर लोकसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते हुए सांसद बने। इस दौरान वे फूड सिविल सप्लाई एवं पब्लिक डिस्ट्रीब्यूशन कमेटी के सदस्य भी रहे।
2005 से 2010 तक उन्होंने जिला प्रमुख के रूप में अपनी सेवाएं दीं। इसके बाद उन्होंने विधानसभा की ओर रुख किया और 2013 में नोखा से विधायक चुने गए। 2014 से 2018 तक वे राजस्थान सरकार में नेता प्रतिपक्ष भी रहे। 2022 में उन्हें राजस्थान स्टेट एग्रो इंडस्ट्रीज डेवलपमेंट बोर्ड के चेयरमैन के रूप में नियुक्त किया गया था।
पिछले विधानसभा चुनाव से पहले वे अस्वस्थ हो गए थे और तभी से कोमा में थे।
रामेश्वर डूडी का राजनीतिक जीवन बेहद प्रभावशाली रहा। उन्होंने उत्तर पश्चिम राजस्थान के किसानों की पीड़ा को मुखरता से उठाया और एक सशक्त किसान नेता के रूप में अपनी पहचान बनाई।
उनके परिवार में उनकी पत्नी, नोखा की वर्तमान विधायक सुशीला डूडी और एक पुत्र हैं। रामेश्वर डूडी के निधन से क्षेत्र में एक युग का अंत हो गया है। उन्होंने अपने कार्यों और विचारों से लोगों के दिलों में एक अमिट छाप छोड़ी है।