आज का दिन, विक्रम संवत 2082, आश्विन मास, शुक्ल पक्ष की द्वादशी तिथि है। श्रीडूंगरगढ़ में आज सूर्योदय प्रात: 6 बजकर 27 मिनट पर हुआ और सूर्यास्त सायं 6 बजकर 17 मिनट पर होगा।
आज के पंचांग के अनुसार, तिथि द्वादशी है जो सायं 5 बजकर 11 मिनट तक रहेगी। नक्षत्र धनिष्ठा प्रात: 9 बजकर 10 मिनट तक रहेगा। योग शूल सायं 7 बजकर 26 मिनट तक है।
पंचांग के अनुसार, तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण के पठन और श्रवण का हमारे जीवन पर विशेष प्रभाव होता है। ऐसा माना जाता है कि तिथि के श्रवण से माँ लक्ष्मी की कृपा, वार के श्रवण से आयु में वृद्धि, नक्षत्र के श्रवण से पापों का नाश और योग के श्रवण से प्रियजनों का प्रेम मिलता है। इसी प्रकार, करण के श्रवण से मनोकामनाएं पूरी होती हैं।
आज के शुभ और अशुभ समय की बात करें तो अभिजीत मुहूर्त दिन में 11 बजकर 58 मिनट से 12 बजकर 46 मिनट तक रहेगा। राहु काल प्रात: 9 बजकर 25 मिनट से 10 बजकर 53 मिनट तक रहेगा। दिशा शूल पूर्व दिशा में रहेगा।
ज्योतिष के जानकारों का कहना है कि शनिवार के दिन प्रात: पीपल के पेड़ में दूध मिश्रित मीठे जल का अर्ध्य देने और सांयकाल में पीपल के नीचे तेल का दीपक जलाने से कुंडली की समस्त ग्रह बाधाओं का निवारण होता है। इसके साथ ही, पीपल के नीचे हनुमान चालीसा का पाठ करने और गायत्री मन्त्र की एक माला का जाप करने से भय दूर होता है और बिगड़े कार्य बनने लगते हैं।
शिवपुराण के अनुसार, शनि देव पिप्लाद ऋषि का स्मरण करने वाले भक्तों को पीड़ा नहीं देते हैं। इसलिए, जिन लोगों पर शनि की दशा चल रही है, उन्हें नित्य पिप्लाद ऋषि का स्मरण करना चाहिए। पिप्पलाद श्लोक या पिप्पलाद ऋषि के तीन नामों (पिप्पलाद, गाधि, कौशिक) का जाप करने से शनि देव की कृपा मिलती है और शनि की पीड़ा शांत होती है।
आज पापांकुशा एकादशी व्रत का पारण है। इसके साथ ही, प्रदोष व्रत भी है। पंचक जारी रहेगा।