दूर-दूर से आए लोग गरबा की विशेष पोशाकों और राजस्थानी पारंपरिक परिधानों में सज-धज कर कार्यक्रम में शामिल हुए। पूरा वातावरण माँ दुर्गा और श्याम बाबा के भजनों से गुंजायमान रहा, जिन पर श्रद्धालुजन भक्तिभाव से झूमते नज़र आए। यह आयोजन न केवल मनोरंजन का माध्यम था, बल्कि इसने लोगों को अपनी संस्कृति और परंपराओं से जुड़ने का भी अवसर दिया।
कार्यक्रम में कई गणमान्य अतिथियों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। समाजसेवी अनिल जोशी, बृजलाल तावणियां, आईबी के वरिष्ठ अधिकारी जितेंद्र कटेवा, राजस्थान कृषि स्टोर के बजरंग भामूं, आपणो गांव सेवा समिति के अध्यक्ष जतन राजपुरोहित और बीकानेर प्रेस क्लब के अध्यक्ष विशाल स्वामी ने कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई। श्रीश्याम ग्रुप के सदस्यों ने सभी अतिथियों का पारंपरिक राजस्थानी अंदाज़ में फूलमालाएँ पहनाकर और साफा बांधकर स्वागत किया। उन्हें स्मृति चिह्न भी भेंट किए गए।
मिसेज इंडिया ग्लेम पूनम की उपस्थिति ने कार्यक्रम में और भी रंग भर दिया। महिलाओं और युवतियों ने उनके साथ खूब तस्वीरें खिंचवाईं और उनसे शुभकामनाएँ प्राप्त कीं।
दूसरे दिन, विभिन्न श्रेणियों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वालों को पुरस्कृत किया गया। सरिता गट्टानी को सर्वश्रेष्ठ गरबा ड्रेस, अनिल वासवानी को सर्वश्रेष्ठ गरबा किंग, प्रमोद और सरिता बोथरा को सर्वश्रेष्ठ कपल, कंचन और पल्लवी को सर्वश्रेष्ठ माँ-बेटी जोड़ी, नेहा शर्मा और उनकी देवरानी को सर्वश्रेष्ठ देवरानी-जेठानी जोड़ी, पूनम और नीतू को सर्वश्रेष्ठ सास-बहू जोड़ी, विजयलक्ष्मी और दिव्या को सर्वश्रेष्ठ बहनें, उर्वशी गुरनाणी को सर्वश्रेष्ठ हेयर स्टाइल, रिया गुरनाणी को महिला वर्ग में सर्वश्रेष्ठ गरबा आउटफिट, महेश स्वामी को पुरुष वर्ग में सर्वश्रेष्ठ गरबा आउटफिट, नविका मालू को सर्वश्रेष्ठ गरबा आउटफिट (बच्चे), कपिल राजपुरोहित को सर्वश्रेष्ठ डांसिंग किड, स्वामी गर्ल्स एंड ग्रुप को सर्वश्रेष्ठ डांस ग्रुप, खुशी मारू एंड ग्रुप को सर्वश्रेष्ठ फैमिली ग्रुप, किरण मोरवानी को स्टार ऑफ नवरात्रि, और राजू और जयश्री सारस्वत को एनर्जेटिक डांस के पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
एक लक्की ड्रा भी आयोजित किया गया, जिसमें विजेताओं को एलईडी टीवी और स्मार्टफोन जैसे आकर्षक पुरस्कार दिए गए। श्रीश्याम ग्रुप के सभी सहयोगी सदस्यों को उनके योगदान के लिए सम्मानित किया गया।
अंत में, श्रीश्याम ग्रुप के एडवोकेट रणवीरसिंह खिची ने सभी आगंतुकों और सहयोगियों के प्रति आभार व्यक्त किया। दो दिवसीय रास गरबा का यह सांस्कृतिक आयोजन श्रीडूंगरगढ़ में हर्षोल्लास और सांस्कृतिक एकता का प्रतीक बन गया।