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माध्यमिक शिक्षा विभाग ने जारी किया बड़ा आदेश: 11,838 प्राध्यापकों को मिली उप-प्राचार्य पद पर पदोन्नति, देखें पूरी लिस्ट

निदेशक सीताराम जाट (IAS) द्वारा जारी इस आदेश ने शिक्षा विभाग में एक नई ऊर्जा का संचार किया है। यह खबर ऐसे समय में आई है जब शिक्षा की गुणवत्ता और प्रशासनिक दक्षता को बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है।

आदेश में स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि सभी चयनित शिक्षकों को 7 अक्टूबर, 2025 तक अपने वर्तमान कार्यस्थल पर ऑफलाइन माध्यम से कार्यभार ग्रहण करना होगा। विभाग ने स्पष्ट किया है कि शाला दर्पण पोर्टल पर ऑनलाइन कार्यग्रहण मान्य नहीं होगा। हालांकि, DPC Entry Tab में ऑफलाइन कार्यग्रहण की प्रविष्टि अनिवार्य रूप से दर्ज करनी होगी।

यदि कोई शिक्षक पदोन्नति स्वीकार नहीं करना चाहता है, तो उसे 6 अक्टूबर, 2025 तक अपना परित्याग पत्र संबंधित संस्था प्रधान के माध्यम से विभाग की ईमेल आईडी vpjoining2025@gmail.com पर भेजना होगा। विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि किसी अन्य ईमेल आईडी पर भेजी गई सूचना स्वीकार्य नहीं होगी।

पदोन्नत शिक्षकों को वेतन का लाभ कार्यग्रहण की तिथि से ही प्राप्त होगा। इसके अतिरिक्त, 1 जून, 2002 के बाद दो से अधिक संतान वाले शिक्षकों का वेतन कार्मिक विभाग की अधिसूचना दिनांक 16 मार्च, 2023 के अनुसार तय किया जाएगा। हालांकि, यह निर्णय वर्तमान में उच्च न्यायालय के अंतिम निर्णय पर निर्भर रहेगा।

यदि कोई चयनित शिक्षक 7 अक्टूबर तक कार्यभार ग्रहण नहीं करता है और न ही पदोन्नति से इनकार करता है, तो उसकी पदोन्नति स्वतः निरस्त मानी जाएगी। एक बार कार्यभार ग्रहण करने के बाद पदोन्नति परित्याग या पदावनति संभव नहीं होगी। यह नियम सुनिश्चित करता है कि पदोन्नति की प्रक्रिया को गंभीरता से लिया जाए और निर्धारित समय सीमा का पालन किया जाए।

आदेश में दिव्यांग श्रेणी में चयनित शिक्षकों के लिए विशेष निर्देश दिए गए हैं कि उनसे प्रमाणपत्र अनिवार्य रूप से प्राप्त किया जाए। इसके अतिरिक्त, जिनके विरुद्ध विभागीय जांच (CCA 16/17) चल रही है, उनके कार्यग्रहण से पहले जांच की तिथि सुनिश्चित करने के लिए कहा गया है।

संस्था प्रधानों को यह सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी दी गई है कि सभी चयनित शिक्षकों का ऑफलाइन कार्यग्रहण/परित्याग शाला दर्पण पोर्टल में दर्ज हो और ईमेल द्वारा सूचना भेजी जाए। निर्धारित समय सीमा में प्रविष्टि नहीं होने पर संस्था प्रधान की जवाबदेही तय की जाएगी।

यह आदेश शिक्षा विभाग में प्रशासनिक सुधारों की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि इस आदेश का जमीनी स्तर पर कितना प्रभावी क्रियान्वयन होता है और इससे शिक्षा की गुणवत्ता में कितना सुधार होता है।

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