श्रीडूंगरगढ़ से एक अद्भुत दृश्य सामने आया। गांव रीड़ी में बुधवार का दिन हर्ष और उल्लास से सराबोर था, जब राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के स्वयंसेवकों का एक दल यहाँ से रवाना हुआ। यह रवानगी किसी सामान्य यात्रा की नहीं, बल्कि एक विशेष उद्देश्य से की गई थी।
श्रीसालानाथ जी महाराज सुपरफास्ट डाक ध्वजा, जो इस यात्रा का प्रतीक थी, सुबह 11:30 बजे रीड़ी से निकली। इस ध्वजा के साथ युवा यात्रियों का एक समूह था, जिनके हृदय में उत्साह और आँखों में एक लक्ष्य था। इन युवाओं ने पूरे जोश के साथ दौड़ लगानी शुरू की।
यह दौड़ केवल शारीरिक शक्ति का प्रदर्शन नहीं थी, बल्कि आस्था और समर्पण का प्रतीक थी। इन युवाओं ने लगातार दौड़ते हुए लगभग 5 घंटे 15 मिनट में 91 किलोमीटर की दूरी तय की। शाम 4:45 बजे, वे कतरियासर पहुंचे।
कतरियासर पहुंचकर, यात्रियों ने जसनाथजी महाराज और मां कल्लादे के दर्शन किए। यह दर्शन एक महत्वपूर्ण पड़ाव था, जहाँ यात्रियों ने अपनी श्रद्धा और भक्ति अर्पित की। मंदिर परिसर में माहौल पूरी तरह से भक्तिमय हो गया था, मानो हर तरफ आस्था का रंग बिखरा हो।
पुरनाथ सिद्ध ने इस घटना पर टिप्पणी करते हुए कहा कि युवाओं की यह दौड़ आस्था और ऊर्जा का एक अद्भुत उदाहरण है। उनकी यह बात इस यात्रा के महत्व को और भी गहराई से उजागर करती है। यह सिर्फ एक स्थान से दूसरे स्थान तक की दौड़ नहीं थी, बल्कि यह युवाओं की आस्था, समर्पण और ऊर्जा का एक जीवंत प्रदर्शन था, जिसने हर देखने वाले को प्रभावित किया।