श्रीडूंगरगढ़: जैन धर्म का महत्वपूर्ण पर्व पर्यूषण, अपने अंतिम पड़ाव संवत्सरी के साथ संपन्न हुआ। तेरापंथ भवन मोमासर में साध्वी प्रमिला कुमारी के सान्निध्य में आयोजित मुख्य कार्यक्रम में, क्षमा और आत्म-शुद्धि का संदेश गुंजा। साध्वी प्रमिला कुमारी ने संवत्सरी को क्षमा दिवस बताते हुए कहा कि यह दिन मन, वचन और काया से हुई भूलों के लिए सभी जीवों से क्षमायाचना करने का अवसर है। उन्होंने इसे पश्चाताप और शुद्धि का प्रतीक बताया, जो व्यक्ति को आत्म-चिंतन और आंतरिक शांति की ओर ले जाता है। “अहिंसा परमो धर्म” के सिद्धांत का पालन करते हुए, उन्होंने “जियो और जीने दो” के मार्ग पर चलने की प्रेरणा दी। साध्वी जी ने चातुर्मास के दौरान स्वयं के भीतर झांकने और आत्म-अनुशासन के महत्व पर भी प्रकाश डाला। कार्यक्रम में साध्वी आस्थाश्री, विज्ञप्रभा और तेजसप्रभा ने भी अपने विचार व्यक्त किए। इस अवसर पर तेरापंथी सभा मोमासर के वरिष्ठ उपाध्यक्ष अशोक पटावरी, अणुव्रत समिति मोमासर की अध्यक्षा सुमन बाफना, मंत्री राकेश संचेती, महिला मंडल अध्यक्ष कंचन पटावरी, आड़सर से अशोक कुमार बरडिया सहित मोमासर और आड़सर के अनेक श्रावक और श्राविकाओं ने भाग लिया और एक दूसरे से क्षमा याचना की।
श्रीडूंगरगढ़: देराजसर और गोपालसर गांवों में हरिराम बाबा के मेला महोत्सव का उल्लास छाया हुआ है। देराजसर में दो दिवसीय मेला महोत्सव का शुभारंभ बुधवार शाम को जागरण के साथ हुआ। मंदिर में आयोजित भव्य जागरण में काकड़ा के जगदीश स्वामी एंड पार्टी ने बाबा के भजनों की प्रस्तुति दी। सूत्रों के अनुसार, गुरुवार को पुजारी गोपारामजी सारस्वा परिवार द्वारा बाबा का विशेष श्रृंगार एवं पूजा अर्चना की जाएगी। इस अवसर पर बाबा की विशेष ज्योत और सामूहिक हवन का आयोजन होगा। मंदिर परिसर को रोशनी से सजाया गया है और दुकानें भी सज चुकी हैं। इसी तरह गोपालसर गांव के हरिराम बाबा मंदिर में भी बुधवार को जागरण का आयोजन हुआ, जिसमें सिनियाला के तोलाराम सोनी एंड पार्टी ने भजनों की प्रस्तुति दी। गुरुवार को मंदिर में दिन भर धार्मिक अनुष्ठान होंगे।
श्रीडूंगरगढ़: द्वारकाधीश पैदल यात्री संघ द्वारा आसोपा चौक पर हरिराम जी के जागरण का आयोजन किया गया। जागरण रात 9 बजे शुरू हुआ, जिसमें दिव्यंम दाधीच एंड पार्टी के भजन कलाकारों ने भजनों की प्रस्तुति दी। जागरण की तैयारियां जोर-शोर से चल रही हैं और बड़ी संख्या में हरिराम जी के श्रद्धालुओं ने भजन गंगा का लाभ उठाया।