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श्रद्धा का ज्वार : रामदेवरा जाने वालों में उत्साह, श्रीडूंगरगढ़ के मंदिरों में उमड़ा जनसैलाब, भण्डारों पर चल रही सेवाएं

श्रीडूंगरगढ़, 26 अगस्त, 2025। अंचल में बाबा रामदेव के बीज (दूज) के पावन अवसर पर भक्ति और आस्था का अद्भुत संगम देखने को मिला। सोमवार को पूरा क्षेत्र श्रद्धा के रंगों में रंगा नज़र आया।

कस्बे के मंदिरों को विशेष रूप से सजाया गया। फूलों की खुशबू और रंगीन रोशनी से जगमगाते मंदिर श्रद्धालुओं को अपनी ओर आकर्षित कर रहे थे। सुबह से लेकर देर रात तक भक्तों का तांता लगा रहा, मानो हर कोई बाबा के चरणों में अपना शीश झुकाने को आतुर था।

बिग्गाबास में स्थित रामदेव मंदिर में जन्मोत्सव का विशेष आयोजन किया गया। मंदिर के पुजारी लीलाधर भार्गव ने बताया कि बाबा की महाआरती के साथ 101 किलो प्रसाद चढ़ाया गया, जिसे बाद में भक्तों में वितरित किया गया। इस अवसर पर सैकड़ों श्रद्धालु उपस्थित थे, जो बाबा के भजनों में लीन होकर भक्ति के सागर में गोते लगा रहे थे।

बीकानेर से रामदेवरा की ओर जाने वाले मार्ग पर भक्तों का रैला उमड़ पड़ा था। हर कोई बाबा के दर्शन के लिए आतुर था। श्रीडूंगरगढ़ से पैदल यात्री संघ नाचते-गाते रामदेवरा की ओर बढ़ रहे थे। बीकानेर से लेकर रामदेवरा तक का पूरा रास्ता बाबा के जयकारों से गूंज रहा था, जिससे वातावरण में एक अलौकिक ऊर्जा का संचार हो रहा था।

इस पदयात्रा में चुरू, हरियाणा, पंजाब, मध्यप्रदेश सहित कई जिलों से आए भक्त भी शामिल थे, जो बाबा के प्रति अपनी अटूट श्रद्धा का प्रदर्शन कर रहे थे।

यात्रा मार्ग में जगह-जगह भंडारे लगाए गए थे, जो यात्रियों के लिए एक आश्रय का काम कर रहे थे। इन भंडारों में भोजन, पानी, चाय से लेकर प्राथमिक चिकित्सा तक की सुविधा उपलब्ध थी। थके हुए यात्रियों के लिए विश्राम की भी व्यवस्था की गई थी। अकेले यात्रा कर रहे श्रद्धालुओं के लिए ये भंडारे एक संबल की तरह थे, जो उन्हें आगे बढ़ने की प्रेरणा दे रहे थे।

मामा-भाणजा सेवा संस्था द्वारा लगाए गए भंडारे में रामसर, सिंजगुरु और बाना के स्वर्णकार परिवार अपनी सेवाएं दे रहे थे, जो सेवाभाव की एक अनूठी मिसाल पेश कर रहे थे।

इस पदयात्रा में हर उम्र के भक्त शामिल थे, जो बाबा के प्रति अपनी आस्था और प्रेम का प्रदर्शन कर रहे थे। बच्चे, युवा और बुजुर्ग सभी एक साथ कदमताल करते हुए रामदेवरा की ओर बढ़ रहे थे, मानो उनके दिलों में बाबा के दर्शन की एक अटूट लालसा थी।

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