WhatsApp Menu
श्री ओसवाल समाज श्रीडूंगरगढ़ का होली स्नेह मिलन: सूर्यास्त से पहले शुरू हुआ भोजन, 11 द्रव्यों की रखी मर्यादा  |  विज्ञान विद्यार्थियों के लिए बड़ी खबर, 7 मार्च से शुरू होंगे विभिन्न परीक्षाओं के टारगेट बैच, भारती ने बुलाई उच्च स्तरीय विषय विशेषज्ञ  |  बाइक पर सालासर बालाजी के दर्शन कर लौट रहें दो युवक कार से टक्कर से हुए घायल, पढें पूरी खबर।  |  शराब पीने के लिए रूपए देने से मना करने पर पीटा युवक को, दो नामजद सहित चार के खिलाफ लगाए आरोप  |  मंडी पहुंचा नया जौ, कई जिंसो में आज मंदी छाई, देखें श्रीडूंगरगढ़ मंडी से सभी जिंसो के “आज के भाव”  | 

रामदेव ने जर्मनी में बजाया डंका, वर्ल्ड ट्रांसप्लांट गेम्स में जीते 4 पदक

श्रीडूंगरगढ़, 25 अगस्त, 2025। कंवरपुरा गाँव के रामदेव सिंह मील ने, जिनकी उम्र 37 वर्ष है, जर्मनी के ड्रेसडन शहर में आयोजित 25वें वर्ल्ड ट्रांसप्लांट एथलेटिक्स गेम्स में अद्भुत प्रदर्शन करते हुए भारत का गौरव बढ़ाया है। 17 से 23 अगस्त के बीच आयोजित इस प्रतियोगिता में उन्होंने एक स्वर्ण, एक रजत और दो कांस्य पदक जीतकर सबका ध्यान अपनी ओर खींचा है।

रामदेव सिंह ने 30 से 39 वर्ष के आयु वर्ग में भाला फेंक (जैवलिन) में स्वर्ण पदक जीतकर सबको चकित कर दिया। उनकी प्रतिभा यहीं नहीं रुकी, उन्होंने लंबीकूद में रजत पदक भी अपने नाम किया। इसके अतिरिक्त, उन्होंने बॉल थ्रो और डिस्कस थ्रो में कांस्य पदक जीतकर यह साबित कर दिया कि वे बहुमुखी प्रतिभा के धनी हैं।

इस प्रतियोगिता में पूरे विश्व से 1600 खिलाड़ियों ने हिस्सा लिया था, जिनमें भारत से 57 खिलाड़ी थे। राजस्थान से कुल 9 खिलाड़ियों ने भाग लिया था, और रामदेव सिंह सीकर जिले से अकेले ही भारतीय दल में शामिल हुए थे।

रामदेव सिंह सालासर एईएन कार्यालय में तकनीशियन फर्स्ट के पद पर कार्यरत हैं। उनका जीवन एक प्रेरणादायक कहानी है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2012 में उनकी माँ ने उन्हें अपनी किडनी देकर नया जीवन दिया था। रामदेव गंभीर पेट की समस्या से जूझ रहे थे, जिसके कारण उनके गुर्दे खराब हो गए थे। उन्हें ठीक होने में लगभग एक साल का समय लगा। रामदेव का कहना है कि यह सफर आसान नहीं था, लेकिन खेलों ने उन्हें नई ऊर्जा और आत्मविश्वास दिया। अपनी मां के प्रेम और खेल के प्रति समर्पण ने उन्हें इस मुकाम तक पहुंचाया है।

उनकी इस शानदार उपलब्धि पर उद्योग जगत से भी बधाइयाँ आ रही हैं। उद्योगपति जुगल किशोर तावनिया ने रामदेव को बधाई देते हुए कहा कि वे युवाओं के लिए एक प्रेरणा स्रोत हैं। उनकी कहानी हमें यह सिखाती है कि जीवन में कितनी भी मुश्किलें आएं, हौसला बनाए रखने से सफलता अवश्य मिलती है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

home होम layers मोबाइल नंबर mic ऑडियोज़ smart_display शॉर्ट्स theaters शोज़