जानकारी के अनुसार, यह घटना बाडेला गांव की है। पानादेवी पत्नी ओमप्रकाश जाट ने पुलिस को दी शिकायत में किशनाराम पुत्र सुरजाराम जाट, उसकी पत्नी, पुत्र नरसाराम और पुत्री सरोज पर गंभीर आरोप लगाए हैं।
पानादेवी का कहना है कि उनकी खेड़ी गांव की आबादी के पास ही स्थित है। खेड़ी की कुछ ज़मीन सरकारी ट्यूबवेल के लिए दी गई है, जबकि बाकी हिस्से में उन्होंने तारबंदी कर रखी है और मूंग की फसल उगाई है। उनका आरोप है कि किशनाराम अक्सर तारबंदी तोड़कर अपने पशुओं को उनकी फसल में चरने के लिए छोड़ देता है।
पीड़िता के अनुसार, 23 अगस्त को जब वह, उनके पति ओमप्रकाश और देवर कानाराम खेड़ी में मूंग की फसल में नींदाण कर रहे थे, तभी किशनाराम ने तारबंदी तोड़कर अपनी गायें खेड़ी में घुसा दीं। जब उनके पति और देवर ने उसे रोकने की कोशिश की, तो किशनाराम और उसके परिवार के सदस्य लाठी, कुल्हाड़ी और पत्थरों से लैस होकर आए और उन पर हमला कर दिया।
आरोप है कि किशनाराम ने कुल्हाड़ी से ओमप्रकाश के सिर पर वार किया, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गया। जब कानाराम बीच-बचाव करने आए, तो उन्हें भी कुल्हाड़ी से मारा गया, जिससे उनके हाथ में चोट आई। पीड़िता का आरोप है कि नरसाराम ने उसके साथ बदसलूकी की और लज्जा भंग की। इसके बाद आरोपियों ने ओमप्रकाश और कानाराम को लातों से पीटा।
शोर सुनकर पीड़िता के ससुर अन्नाराम और ताऊ ससुर मोहनराम मौके पर पहुंचे और आरोपियों को रोकने की कोशिश की, जिसके बाद वे वहां से चले गए। पीड़िता ने पुलिस से सख्त कार्रवाई की मांग की है। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है, जिसकी जिम्मेदारी हेड कांस्टेबल बलवीरसिंह को सौंपी गई है।
सूत्रों के अनुसार, इस घटना से पहले किशनाराम की पत्नी लिछमा ने भी दूसरे पक्ष के खिलाफ मारपीट का मामला दर्ज कराया था।