25 अगस्त 2025 की रात, श्रीडूंगरगढ़ के मोमासर बास में एक परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। रफीक नामक एक पिता, अपनी 18 वर्षीय बेटी और घर से गायब हुए दो लाख रुपए नकद और सोने-चांदी के गहनों की तलाश में पुलिस थाने के दरवाजे पर दस्तक दे रहा था। उसकी आँखों में चिंता और निराशा का गहरा सागर था।
रफीक ने पुलिस को बताया कि 21 अगस्त की रात, खाना खाने के बाद सब लोग लगभग 10 बजे सो गए थे। रफीक को नींद नहीं आ रही थी, इसलिए वह आधी रात तक टेलीविजन देखते रहे। उनकी बेटी उसी कमरे में सो रही थी। जब रफीक को नींद आई और वह सो गए, तो सुबह 4 बजे उठने पर उन्होंने पाया कि उनकी बेटी बिस्तर पर नहीं है। घर में रखा उसका मोबाइल भी गायब था।
घर के दूसरे कमरे में रोशनी देखकर रफीक उस तरफ गए, तो उनके पैरों तले जमीन खिसक गई। अलमारी खुली हुई थी और उसमें रखा दो लाख रुपए नकद, सोने के झूमर, कानों की बालियां, लूंग, पायल, बेटी का आधार कार्ड और स्कूल के कागजात सब गायब थे।
परिजनों ने रात भर बेटी को हर संभव जगह पर ढूंढा, लेकिन वह कहीं नहीं मिली। अब वे पुलिस से गुहार लगा रहे हैं कि उनकी बेटी को ढूंढने में मदद करें। पुलिस ने गुमशुदगी का मामला दर्ज कर लिया है और हैड कांस्टेबल भगवानाराम को जांच सौंप दी है।
यह घटना एक सवाल छोड़ जाती है कि आखिर एक रात में ऐसा क्या हुआ कि एक युवती अपने घर, अपने परिवार और अपने सपनों को छोड़कर चली गई? वह कौन सी परिस्थितियाँ थीं, जिन्होंने उसे यह कदम उठाने पर मजबूर कर दिया? ये सवाल पुलिस की जांच के साथ-साथ समाज को भी सोचने पर मजबूर करते हैं।