श्रीडूंगरगढ़, 24 अगस्त, 2025। कहते हैं, माँ की ममता में सृजन की शक्ति होती है। यह शक्ति न केवल अपने बच्चों के लिए उमड़ती है, बल्कि करुणा का सागर बनकर समाज के हर ज़रूरतमंद तक पहुँचती है। इसी भावना को साकार करते हुए, माहेश्वरी महिला मंडल, श्रीडूंगरगढ़ ने रविवार को कालूबास स्थित माहेश्वरी भवन में एक दिवसीय चिकित्सा परामर्श शिविर का आयोजन किया।
जैसे एक माँ अपने बच्चे की पीड़ा हरने के लिए तत्पर रहती है, उसी भाव से मंडल की कार्यकर्ताओं ने रोगियों की सेवा में खुद को समर्पित कर दिया। उन्होंने शिविर की व्यवस्थाओं को संभाला और आने वाले हर व्यक्ति का आत्मीयता से स्वागत किया।
शिविर का शुभारंभ, चिकित्सकों द्वारा फीता काटकर और महेश पूजन के साथ हुआ। इस अवसर पर चिकित्सकों ने कहा कि सेवा ही सबसे बड़ा धर्म है और मानव मात्र की सेवा ही ईश्वर की सच्ची आराधना है।
पूरे दिन, शिविर में रोगियों का तांता लगा रहा। विभिन्न रोगों से पीड़ित लोग यहाँ पहुंचे और अनुभवी चिकित्सकों से परामर्श प्राप्त किया। चिकित्सकों ने भी बिना थके, बिना रुके, रोगियों की सेवा की।
जानकारी के अनुसार, शिविर में डॉ. रुचिर अरन ने 40, डॉ. मीनाक्षी गोम्बर ने 70, डॉ. विकास पारीक ने 90, डॉ. जी. एस. विजय ने 110, डॉ. मदन गोपाल भट्टड़ ने 70, डॉ. सौरभ अग्रवाल ने 90 और डॉ. गौरव गोम्बर ने 150 से अधिक रोगियों को परामर्श दिया।
मंडल की सदस्याओं ने सभी चिकित्सकों का हृदय से आभार व्यक्त किया और उन्हें स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया। उन्होंने कहा कि चिकित्सकों का यह निःस्वार्थ भाव और सेवा भावना समाज के लिए प्रेरणादायक है।
यह शिविर, सेवा और करुणा का एक अनुपम उदाहरण था, जिसने माँ की ममता को चरितार्थ करते हुए, समाज को एक नई दिशा दिखाई। यह एक ऐसा प्रयास था, जो बताता है कि सच्ची सेवा ही जीवन का सार है और मानवता ही सबसे बड़ा धर्म।