21 अगस्त, 2025 की रात श्रीडूंगरगढ़ के आसपास की सड़कें मानो किसी अनहोनी का संकेत दे रही थीं। हाइवे पर एक के बाद एक हुए दो हादसों ने रात की शांति भंग कर दी, और पांच जिंदगियां घायल हो गईं।
पहला हादसा लखासर टोल नाके के करीब हुआ। रात गहराती जा रही थी, जब दो बोलेरो गाड़ियां एक दूसरे से जा भिड़ीं। टक्कर इतनी ज़ोरदार थी कि गाड़ियों का मलबा दूर तक फैल गया। इस दुर्घटना में चार लोग घायल हो गए। लखासर के रहने वाले 25 वर्षीय छैलूसिंह और 20 वर्षीय धीरजसिंह बुरी तरह चोटिल हुए। वहीं दूसरी बोलेरो में सवार मोहबतपुर के 40 वर्षीय पूर्णमल और 60 वर्षीय रोहताश भी घायल हो गए।
टोल प्लाजा पर मौजूद कर्मचारियों ने तुरंत हरकत में आते हुए एंबुलेंस बुलाई और घायलों को श्रीडूंगरगढ़ के उपजिला अस्पताल पहुंचाया। नर्सिंग ऑफिसर अमित कुमार और उनके सहयोगी चिकित्सा कर्मियों ने तत्परता से घायलों की देखभाल की, लेकिन उनकी गंभीर हालत को देखते हुए उन्हें बेहतर इलाज के लिए बीकानेर रेफर कर दिया गया।
अभी इस हादसे की खबर ठंडी भी नहीं हुई थी कि रात लगभग 2 बजे एक और दुर्घटना घट गई। लखासर के ही रहने वाले 30 वर्षीय पंकज, पुत्र उपेंद्र, अपनी मोटरसाइकिल पर सवार होकर जा रहे थे कि अचानक एक गाय सड़क पर आ गई। पंकज संभल पाते, इससे पहले ही उनकी बाइक गाय से टकरा गई। टक्कर इतनी भयानक थी कि गाय की मौके पर ही मौत हो गई, और पंकज गंभीर रूप से घायल हो गए।
टोल कर्मचारियों ने फिर से मानवता का परिचय देते हुए एंबुलेंस की मदद से पंकज को उपजिला अस्पताल पहुंचाया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद उन्हें भी आगे की जांच के लिए बीकानेर जाने की सलाह दी गई।
इन हादसों की सूचना तत्काल पुलिस को दी गई। टोल कर्मचारियों ने क्रेन की मदद से क्षतिग्रस्त वाहनों और मृत गाय को हाइवे से हटाकर यातायात को सुचारू रूप से चालू करवाया। इन दुर्घटनाओं ने एक बार फिर सड़क सुरक्षा के मुद्दे को उजागर कर दिया है, और सोचने पर मजबूर कर दिया है कि क्या कुछ और किया जा सकता था जिससे इन हादसों को टाला जा सकता था।