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खरीफ की बंपर पैदावार के लिए गर्मी की गहरी जुताई संजीवनी- रघुवर दयाल

श्रीडूंगरगढ़ श्रीडूंगरगढ़ ONE 19 अप्रैल 2026। किसानों के लिए खास खबर कृषि विभाग से आई है। सहायक निदेशक कृषि (विस्तार) रघुवर दयाल सुथार ने क्षेत्र के किसानों को सलाह देते हुए कहा है कि वे मूंगफली, मोठ, मूंग, बाजरा और ग्वार की बुवाई से पूर्व ‘गर्मी की गहरी जुताई’ अवश्य करें। यह प्रक्रिया न केवल मिट्टी का स्वास्थ्य सुधारती है, बल्कि पैदावार में 25% तक की वृद्धि कर सकती है। उन्होंने कहा कि खरीफ सीजन की शुरुआत से पहले खेतों को तैयार करने का सबसे उपयुक्त समय चल रहा है। सुथार ने बताया कि अप्रैल से जून के बीच, जब तापमान 35°C से 45°C के बीच होता है, तब मिट्टी पलटने वाले हल (MB Plough) से 9-12 इंच गहरी जुताई करना ‘सौरीकरण’ (Soil Solarization) का काम करता है। उन्होंने गहरी जुताई से होने वाले मुख्य लाभ की जानकारी देते हुए बताया कि कीट और रोग नियंत्रण के लिए चिलचिलाती धूप से मिट्टी की गहरी परतों में छीपे हानिकारक कीड़ों के लार्वा, प्यूपा और फंगस ऊपर आकर नष्ट हो जाते हैं। किसान को खरपतवार से मुक्ति मिलेगी। जैसे बहुवर्षीय खरपतवारों की जड़ें धूप में सूखकर खत्म हो जाती हैं, जिससे अगली फसल में निराई-गुड़ाई का खर्च कम आता है। इससे मिट्टी की उर्वरता में सुधार होगा और पुरानी फसल के अवशेष मिट्टी में दबकर सड़ जाते हैं, जिससे ‘ह्यूमस’ बढ़ता है। साथ ही, नीचे की ताजा मिट्टी ऊपर आने से पोषक तत्व अधिक सक्रिय होते हैं। सुथार ने कहा कि गहरी जुताई से मिट्टी भुरभुरी हो जाती है, जिससे मानसून की पहली बारिश का पानी जमीन की गहराई तक सोखा जाता है। यह कम वर्षा की स्थिति में भी फसल को नमी प्रदान करता है।

उन्नत खेती के लिए महत्वपूर्ण सुझाव 

  1. उचित उपकरण: जुताई के लिए मिट्टी पलटने वाले हल (*MB Plough*) या डिस्क हैरो का ही प्रयोग करें।
  2. जुताई की दिशा: यदि खेत का ढलान पूर्व-पश्चिम है, तो जुताई *उत्तर-दक्षिण दिशा* में करें। इससे वर्षा जल का बहाव रुकता है और भू-कटाव कम होता है।
  3. समय और आवृत्ति: रबी की कटाई के तुरंत बाद अप्रैल-मई का समय इसके लिए सर्वश्रेष्ठ है। हर *3 साल में कम से कम एक बार* गहरी जुताई अवश्य करनी चाहिए।

वहीं सहायक निदेशक ने किसानों से संतुलित उर्वरक प्रयोग की अपील करते हुए जुताई के साथ-साथ किसानों से *मिट्टी जांच* करवाने का आग्रह भी किया है। उन्होंने बताया कि मूंगफली के लिए जिप्सम (250-300 किग्रा/हेक्टेयर) और दलहनी फसलों के लिए राइजोबियम कल्चर का प्रयोग संतुलित मात्रा में करें। यूरिया और डीएपी का प्रयोग केवल मृदा स्वास्थ्य कार्ड की सिफारिश के आधार पर ही करें ताकि खेती की लागत कम और लाभ अधिक हो सके।

ये खबर सभी किसान अपने आस पास के सभी किसानों तक जरूर पहुंचाएं जिससे कृषि विभाग के जरूरी सुझाव उनतक पहुंच सकें। 

 

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