श्री गणेशाय नम:
शास्त्रों के अनुसार तिथि के पठन और श्रवण से माँ लक्ष्मी की कृपा मिलती है ।
वार के पठन और श्रवण से आयु में वृद्धि होती है।
नक्षत्र के पठन और श्रवण से पापो का नाश होता है।
योग के पठन और श्रवण से प्रियजनों का प्रेम मिलता है। उनसे वियोग नहीं होता है ।
*करण के पठन श्रवण से सभी तरह की मनोकामनाओं की पूर्ति होती है ।
इसलिए हर मनुष्य को जीवन में शुभ फलो की प्राप्ति के लिए नित्य पंचांग को देखना, पढ़ना चाहिए ।
आज का पंचांग
26 – Mar – 2026
Sri Dungargarh, India
पंचांग
तिथि अष्टमी 11:51 AM
नक्षत्र आर्द्रा 04:19 PM
करण :
बव 11:51 AM
बालव 11:51 AM
पक्ष शुक्ल
योग शोभन +00:30 AM
वार गुरूवार
सूर्य व चन्द्र से संबंधित गणनाएँ
सूर्योदय 06:31 AM
चन्द्रोदय 12:07 PM
चन्द्र राशि मिथुन
चन्द्र वास पश्चिम
सूर्यास्त 06:48 PM
चन्द्रास्त +02:45 AM
ऋतु वसंत
हिन्दू मास एवं वर्ष
शक सम्वत 1948 पराभव
कलि सम्वत 5127
दिन काल 12:16 PM
विक्रम सम्वत 2083
मास अमांत चैत्र
मास पूर्णिमांत चैत्र
शुभ और अशुभ समय
शुभ समय
अभिजित 12:15:30 – 13:04:35
अशुभ समय
दुष्टमुहूर्त 10:37 AM – 11:26 AM
कंटक 03:31 PM – 04:20 PM
यमघण्ट 07:20 AM – 08:10 AM
राहु काल 02:12 PM – 03:44 PM
कुलिक 10:37 AM – 11:26 AM
कालवेला या अर्द्धयाम 05:10 PM – 05:59 PM
यमगण्ड 06:31 AM – 08:03 AM
गुलिक काल 09:35 AM – 11:07 AM
दिशा शूल
दिशा शूल दक्षिण
चन्द्रबल और ताराबल
ताराबल
अश्विनी, कृत्तिका, मृगशिरा, आर्द्रा, पुनर्वसु, पुष्य, मघा, उत्तरा फाल्गुनी, चित्रा, स्वाति, विशाखा, अनुराधा, मूल, उत्तराषाढ़ा, धनिष्ठा, शतभिषा, पूर्वाभाद्रपद, उत्तराभाद्रपद
चन्द्रबल
मेष, मिथुन, सिंह, कन्या, धनु, मकर
चोघडिया
शुभ 06:31:49 – 08:03:53
रोग 08:03:53 – 09:35:56
उद्वेग 09:35:56 – 11:07:59
चल 11:07:59 – 12:40:03
लाभ 12:40:03 – 14:12:06
अमृत 14:12:06 – 15:44:09
काल 15:44:09 – 17:16:12
शुभ 17:16:12 – 18:48:15
अमृत 18:48:15 – 20:16:04
चल 20:16:04 – 21:43:52
रोग 21:43:52 – 23:11:40
काल 23:11:40 – 24:39:28
लाभ 24:39:28 – 26:07:16
उद्वेग 26:07:16 – 27:35:04
शुभ 27:35:04 – 29:02:52
अमृत 29:02:52 – 30:30:40
लग्न तालिका
मीन द्विस्वाभाव
शुरू: 06:03 AM समाप्त: 07:28 AM
मेष चर
शुरू: 07:28 AM समाप्त: 09:04 AM
वृषभ स्थिर
शुरू: 09:04 AM समाप्त: 11:00 AM
मिथुन द्विस्वाभाव
शुरू: 11:00 AM समाप्त: 01:15 PM
कर्क चर
शुरू: 01:15 PM समाप्त: 03:35 PM
सिंह स्थिर
शुरू: 03:35 PM समाप्त: 05:52 PM
कन्या द्विस्वाभाव
शुरू: 05:52 PM समाप्त: 08:09 PM
तुला चर
शुरू: 08:09 PM समाप्त: 10:28 PM
वृश्चिक स्थिर
शुरू: 10:28 PM समाप्त: अगले दिन 00:47 AM
धनु द्विस्वाभाव
शुरू: अगले दिन 00:47 AM समाप्त: अगले दिन 02:51 AM
मकर चर
शुरू: अगले दिन 02:51 AM समाप्त: अगले दिन 04:34 AM
कुम्भ स्थिर
शुरू: अगले दिन 04:34 AM समाप्त: अगले दिन 06:03 AM
आप सभी को नवरात्री के आठवें दिन दुर्गा अष्टमी एवं रामनवमी की हार्दिक शुभकामनायें, जय माँ महा गौरी
आज राम नवमी है । चैत्र शुक्ल पक्ष की नवमी को रामनवमी का त्यौहार मनाया जाता है। आज भगवान श्री राम का जन्मदिवस अर्थात राम नवमी है ।
हिन्दु धर्म शास्त्रो के अनुसार त्रेतायुग में धर्म की पुन: स्थापना तथा रावण के अत्याचारो को समाप्त करने के लिये श्री विष्णु भगवान ने मृत्यु लोक में श्री राम चन्द्र के रुप में चैत्र माह शुक्ल की नवमी के दिन राजा दशरथ के घर में अवतार लिया था। इसीलिए इस दिन पूरे दिन शुभ समय, पवित्र मुहूर्त होता है।
आज नवरात्री के आठवें दिन, दुर्गा अष्टमी के दिन बहुत से भक्त गण नन्ही नन्ही कन्याओं जिन्हे कंजके भी कहते है उनकी पूजा करते है, उनके भक्ति भाव से अपने घर में बुलाकर उन्हें भोजन कराकर उन्हें उपहार देकर, उनसे आशीर्वाद लेते है ।
मान्यता है कि जो भी भक्त गण नवरात्रि में माँ दुर्गा की पूजा करते है, नवरात्री का ब्रत रखते है उन्हें नवरात्री की अष्टमी या नवमी के दिन कन्याओं का पूजन अवश्य ही करना चाहिए । नवरात्री में कन्या पूजन के बिना ब्रत पूर्ण नहीं माना जाता है ।
शास्त्रों के अनुसार माँ दुर्गा होम, जप और दान से इतनी प्रसन्न नहीं होतीं जितनी कन्या पूजन से प्रसन्न होती हैं। कन्या पूजन से सभी तरह के वास्तु दोष,विघ्न, भय और शत्रुओं का नाश होता है।
देवी पुराण में लिखा है कि, इन्द्र ने एक बार ब्रह्मा जी से देवी दुर्गा को प्रसन्न करने की विधि पूछी तो ब्रह्मा जी ने माँ दुर्गा को प्रसन्न करने की सर्वोत्तम विधि कन्या पूजन को ही बताया, कन्या पूजन से सभी तरह के वास्तु दोष,विघ्न, भय और शत्रुओं का नाश होता है।
नवरात्री की अष्टमी तथा नवमी के दिन कन्या पूजन में 9 कन्याओं का पूजन करना चाहिए, साथ ही एक छोटे बालक को भी साथ में पूज कर उसे भी भोजन करवाना चाहिए ।
नवरात्रि में कन्या पूजन में ध्यान रखे कि कन्याओ की उम्र दो वर्ष से कम और दस वर्ष से ज्यादा भी न हो ।
पूजी जाने वाली कन्याओं को देवी के शक्ति स्वरूप का प्रतीक मानकर उनको श्रद्धा से जीमाना चाहिए ।
नवरात्र में नौ कन्याओं को माता के नौ रूपों क्रमश: शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कूष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी एवं सिद्धिदात्री का रूप मानकर उनकी पूजा का विधान है।
शास्त्रों के अनुसार नवरात्र में की गयी पूजा-पाठ, आराधना और कन्या पूजा कभी निष्फल नहीं होती भक्तो को उसका फल अवश्य ही मिलता है।
कन्या पूजन में सभी कन्याओं और एक बालक के पहले चरण धोकर, साफ कर के उन्हें साफ आसान पर बिठायें फिर उन सभी के मस्तक पर रोली का तिलक करके उनके हाथ में कलावा बांधें । फिर जो भी श्रद्धा पूर्वक बना हो उन्हें इन कन्याओं के आगे परोसे ।
इसके बाद कन्या पूजन के दिन जिस प्रशाद से मां दुर्गा को भोग लगाया हो उस प्रशाद को भोग के बाद सबसे पहले कन्याओं को ही खिलाना चाहिए।
कन्याओं के भोजन करने के उपरांत उन्हें अपनी सामर्थनुसार उपहार और दक्षिणा देकर उन सब के पैर छूकर उनसे आशीर्वाद लें, मन ही मन मे माँ का ध्यान करके हुए अपनी गलतियों, पापो के लिए क्षमा मांगते हुए अपनी मनोकामना भी कहे, और उन कंजको को अगले नवरात्री में फिर से अपने घर में आने का निमंत्रण दें ।
पण्डित श्रीडूंगरगढ़ ONE