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22 मार्च 2026 का पंचांग, साथ जाने और भी कई खास बातें आचार्य श्रीडूंगरगढ़ ONE के साथ।  |  गणगौर उत्सवों की मची है धूम  |  श्रीडूंगरगढ़ क्षेत्र से न्यूज एक्सप्रेस में पढ़ें आज की कुछ खास खबरें एकसाथ  |  भागवत कथा में दूसरे दिन राजा परीक्षित के प्रसंग सुन भाव विभोर हुए श्रद्धालु।  |  सातलेरा-बिग्गा में धूमधाम से निकली गणगौर की सवारी, मगरिया में उमड़ा जनसैलाब  | 

22 मार्च 2026 का पंचांग, साथ जाने और भी कई खास बातें आचार्य श्रीडूंगरगढ़ ONE के साथ।

श्रीडूंगरगढ़ श्रीडूंगरगढ़ ONE 22 मार्च 2026।श्री गणेशाय नम:शास्त्रों के अनुसार तिथि के पठन और श्रवण से माँ लक्ष्मी की कृपा मिलती है ।
वार के पठन और श्रवण से आयु में वृद्धि होती है।
नक्षत्र के पठन और श्रवण से पापो का नाश होता है।
योग के पठन और श्रवण से प्रियजनों का प्रेम मिलता है। उनसे वियोग नहीं होता है ।
*करण के पठन श्रवण से सभी तरह की मनोकामनाओं की पूर्ति होती है ।
इसलिए हर मनुष्य को जीवन में शुभ फलो की प्राप्ति के लिए नित्य पंचांग को देखना, पढ़ना चाहिए ।

आज का पंचांग

22 – Mar – 2026
Sri Dungargarh, India

पंचांग
तिथि चतुर्थी 09:19 PM
नक्षत्र भरणी 10:43 PM
करण :
वणिज 10:39 AM
विष्टि 10:39 AM
पक्ष शुक्ल
योग वैधृति 03:40 PM
वार रविवार

सूर्य व चन्द्र से संबंधित गणनाएँ
सूर्योदय 06:36 AM
चन्द्रोदय 08:24 AM
चन्द्र राशि मेष
चन्द्र वास पूर्व
सूर्यास्त 06:46 PM
चन्द्रास्त 10:32 PM
ऋतु वसंत

हिन्दू मास एवं वर्ष
शक सम्वत 1948 पराभव
कलि सम्वत 5127
दिन काल 12:09 PM
विक्रम सम्वत 2083
मास अमांत चैत्र
मास पूर्णिमांत चैत्र

शुभ और अशुभ समय
शुभ समय
अभिजित 12:16:56 – 13:05:34
अशुभ समय
दुष्टमुहूर्त 05:08 PM – 05:57 PM
कंटक 10:39 AM – 11:28 AM
यमघण्ट 01:54 PM – 02:42 PM
राहु काल 05:14 PM – 06:46 PM
कुलिक 05:08 PM – 05:57 PM
कालवेला या अर्द्धयाम 12:16 PM – 01:05 PM
यमगण्ड 12:41 PM – 02:12 PM
गुलिक काल 03:43 PM – 05:14 PM
दिशा शूल
दिशा शूल पश्चिम

चन्द्रबल और ताराबल
ताराबल
अश्विनी, भरणी, कृत्तिका, रोहिणी, आर्द्रा, पुष्य, मघा, पूर्वा फाल्गुनी, उत्तरा फाल्गुनी, हस्त, स्वाति, अनुराधा, मूल, पूर्वाषाढ़ा, उत्तराषाढ़ा, श्रवण, शतभिषा, उत्तराभाद्रपद
चन्द्रबल
मेष, मिथुन, कर्क, तुला, वृश्चिक, कुम्भ

चोघडिया

उद्वेग 06:36:24 – 08:07:37
चल 08:07:37 – 09:38:50
लाभ 09:38:50 – 11:10:02
अमृत 11:10:02 – 12:41:15
काल 12:41:15 – 14:12:28
शुभ 14:12:28 – 15:43:40
रोग 15:43:40 – 17:14:53
उद्वेग 17:14:53 – 18:46:06
शुभ 18:46:05 – 20:14:44
अमृत 20:14:44 – 21:43:23
चल 21:43:23 – 23:12:02
रोग 23:12:02 – 24:40:41
काल 24:40:41 – 26:09:19
लाभ 26:09:19 – 27:37:58
उद्वेग 27:37:58 – 29:06:37
शुभ 29:06:37 – 30:35:16

लग्न तालिका

मीन द्विस्वाभाव
शुरू: 06:19 AM समाप्त: 07:44 AM

मेष चर
शुरू: 07:44 AM समाप्त: 09:20 AM

वृषभ स्थिर
शुरू: 09:20 AM समाप्त: 11:16 AM

मिथुन द्विस्वाभाव
शुरू: 11:16 AM समाप्त: 01:31 PM

कर्क चर
शुरू: 01:31 PM समाप्त: 03:51 PM

सिंह स्थिर
शुरू: 03:51 PM समाप्त: 06:08 PM

कन्या द्विस्वाभाव
शुरू: 06:08 PM समाप्त: 08:24 PM

तुला चर
शुरू: 08:24 PM समाप्त: 10:44 PM

वृश्चिक स्थिर
शुरू: 10:44 PM समाप्त: अगले दिन 01:02 AM

धनु द्विस्वाभाव
शुरू: अगले दिन 01:02 AM समाप्त: अगले दिन 03:07 AM

मकर चर
शुरू: अगले दिन 03:07 AM समाप्त: अगले दिन 04:50 AM

कुम्भ स्थिर
शुरू: अगले दिन 04:50 AM समाप्त: अगले दिन 06:19 AM

आप सभी को नवरात्री के चौथे दिन की हार्दिक शुभकामनायें , जय माँ कुष्मांडा
नवरात्री के चौथे दिन माँ कुष्मांडा की पूजा की जाती है। जब सृष्टि नहीं थी, चारों तरफ अंधकार ही अंधकार था, तब इसी देवी ने अपने हास्य से ब्रह्मांड की रचना की थी। इसीलिए माँ कुष्मांडा कोआदि शक्ति कहा गया है।

माता का निवास सूर्यमंडल के भीतर के लोक में माना गया है।

शास्त्रों के अनुसार मां कुष्मांडा की पूजा करने से यश, बल, आयु, और स्वास्थ्य में वृद्धि होती है। मां कुष्मांडा संसार को अनेक कष्टों और संकटों से मुक्ति दिलाती हैं।

संस्कृत भाषा में कूष्माण्डा को कुम्हड़ कहते हैं। बलियों में कुम्हड़े की बलि इन्हें सर्वाधिक प्रिय है। इस कारण से भी माँ कूष्माण्डा कहलाती हैं।

क्योंकि मां कुष्मांडा को लाल रंग के फूल अधिक प्रिय बताए गए हैं इसलिए इस दिन लाल रंग के फूलों से माँ की पूजा करने का विधान है।

माँ कुष्मांडा देवी को अष्टभुजा भी कहा जाता है, इनकी आठ भुजाएं हैं। मां के हाथों में धनुष-बाण, चक्र, गदा, अमृत कलश, कमल, कमंडल सुशोभित है। मां के हाथों में सिद्धियों और निधियों से युक्त जप की माला भी है। माँ कुष्मांडा की सवारी सिंह है।

चौथे नवरात्रि के दिन माता कुष्मांडा को मालपुआ का भोग लगाने से समस्त इच्छाओं की पूर्ति होती है । माँ कूष्माण्डा को फल, सूखे मेवे और सौभाग्य का सामान भेंट करने से माँ शीघ ही प्रसन्न होती हैं

पण्डित श्रीडूंगरगढ़ ONE

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