डूंगरगढ़ one 8 मार्चश्रीडूंगरगढ़। अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर अखिल भारतीय साहित्य परिषद की ओर से महिला संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में वक्ताओं ने महिलाओं को अपनी जड़ों से जुड़कर संस्कृति संरक्षण और समाज निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया।
मुख्य ब्लॉक शिक्षा अधिकारी सरोज पूनियां वीर ने कहा कि आज की महिलाएं बराबरी की दौड़ में अपनी श्रेष्ठता न खोएं। भारतीय संस्कृति में महिलाएं प्राचीन काल से ही सबला रही हैं। उन्होंने कहा कि महिलाएं परिवार के सहयोग से संस्कृति संरक्षण के भाव के साथ समाज में विशिष्ट पहचान बनाएं और राष्ट्र निर्माता, बाल निर्माता तथा चरित्र निर्माता के रूप में समाज को सशक्त बनाने में योगदान दें।
मुख्य वक्ता शिक्षाविद् संगीता बीकानेर ने दक्षिण भारत की वीरांगना रानी अबक्का के जीवन का उल्लेख करते हुए कहा कि महिलाएं बच्चों में सावधानी और संस्कार निर्माण पर ध्यान दें तथा वर्तमान समय की चुनौतियों का साहस के साथ सामना करें।
कार्यक्रम की अध्यक्षता परिषद की शाखा अध्यक्ष भगवती पारीक ‘मनु’ ने की। मंच पर उपप्राचार्य संतोष वीर भी मौजूद रहीं। कार्यक्रम की शुरुआत अतिथियों द्वारा दीप प्रज्ज्वलन से हुई। परिषद सदस्य सरोज शर्मा ने अतिथियों का स्वागत किया तथा पुष्पा शर्मा ने मंच संचालन किया।
संगोष्ठी में राजस्थान की ऐतिहासिक वीरांगनाओं पर पत्र वाचन भी हुआ। कक्षा 11 की छात्रा कांता स्वामी ने काली बाई भील के जीवन, साहस और देशभक्ति पर प्रकाश डाला। रेणु प्रजापत ने पन्नाधाय के त्याग, मनसा सोनी ने मीरा बाई, सीमा भोजक ने रानी पद्मिनी, अंबिका डागा ने हाड़ी रानी तथा मंजू ने कर्मा बाई की भक्ति पर पत्र वाचन किया।
इस अवसर पर तमन्ना झाबक ने मां भारती की आराधना में ओजस्वी कविता प्रस्तुत की। कार्यक्रम में पवन कुमार शर्मा, डॉ. महावीर पंवार, विद्या बाहेती, कंचनलता व्यास, गौरा शर्मा, आशाराम पारीक, लक्ष्मीनारायण भादू सहित अनेक महिलाएं, पुरुष और सेवाधाम के छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।