श्रीडूंगरगढ़ ONE 8 मार्च 2026। आज की महिलाएं बराबरी के चक्कर में अपनी श्रेष्ठता ना खोएं। इस देश में महिलाएं पुरातन काल से ही सबला है। आज उन्हें अपनी जड़ों की ओर लौटने व अपनी भूमिका पर गौर करने की जरूरत है। महिलाएं अपने परिवार का साथ और समर्थन लेकर संस्कृति रक्षण के भाव से समाज में विशिष्ट पहचान गढ़कर महिला जाति को प्रेरणा देंवे। ये विचार मुख्य ब्लॉक शिक्षा अधिकारी सरोज पूनियां वीर ने अखिल भारतीय साहित्य परिषद की ओर से अंतरराष्ट्रीय दिवस पर आयोजित संगोष्ठी में कही। पूनियां ने कहा कि महिलाएं संकल्प लेकर राष्ट्र निर्माता, बच्चे की निर्माता, चरित्र निर्माता और जागरूक होकर समाज को सशक्त बनाने में योगदान देवें।
कार्यक्रम में मुख्य वक्ता शिक्षाविद् संगीता बीकानेर ने दक्षिण भारत की वीरांगना रानी अबक्का के बारे में जानकारी देते हुए महिलाओं को बच्चों में सावधानी व सर्तकता के साथ संस्कार निर्माण करने की प्रेरणा दी। उन्होंने कहा कि महिलाएं वर्तमान समय की समस्याओं का वीरता के साथ सामना करें और सजग रहकर किसी छलावे में ना आए।
मंच पर संतोष वीर उपप्राचार्य भी मौजूद रही। कार्यक्रम की अध्यक्षता परिषद की शाखा अध्यक्ष भगवती पारीक ‘मनु’ ने की व उन्होंने सभी का आभार जताया। कार्यक्रम का प्रारंभ अतिथियों द्वारा दीप प्रज्ज्वलन के साथ किया गया। परिषद सदस्य सरोज शर्मा ने सभी का स्वागत किया व पुष्पा शर्मा ने मंच संचालन किया।
राजस्थान की ऐतिहासिक वीरांगनाओं के बारे में पत्र वाचन किए गए। अन्याय के विरुद्ध आवाज उठाने की बात करते हुए 11वीं की छात्रा कांता स्वामी ने काली बाई भील के जन्म, साहस, गुरुभक्ति व देशभक्ति के बारे जानकारी दी। रेणु प्रजापत ने पन्नाधाय के बारे में पत्र वाचन करते हुए उनसे जुड़े इतिहास की जानकारी दी। देश व राष्ट्र के लिए पुत्र का बलिदान देकर राष्ट्रधर्म को सर्वोच्च है। मनसा सोनी भक्त शिरोमणि मीरा बाई पर पत्र वाचन किया। उनके इतिहास के बारे में जानकारी दी। वहीं सीमा भोजक ने रानी पद्मिनी के शौर्य व जौहर के बारे में पत्र वाचन किया। अंबिका डागा ने हाड़ी रानी के बलिदान के बारे में पत्र वाचन किया। मंजू ने कर्मा बाई की भक्ति के बारे में पत्र वाचन किया। तमन्ना झाबक ने मां भारती की अराधना में ओजस्वी कविता प्रस्तुति दी। संगोष्ठी में पवन कुमार शर्मा, डॉ महावीर पंवार, लेखिका विद्या बाहेती, कंचनलता व्यास, गौरा शर्मा, आशाराम पारीक, लक्ष्मीनारायण भादू अनेक महिलाओं, पुरूषों व सेवाधाम के छात्र छात्राओं ने भागीदारी निभाई।