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राजस्थान के सरकारी स्कूलों में दीवार पर दिखेगी टीचर्स की पूरी कुंडली

फोटो, एम्पलॉयी आईडी, योग्यता और कौन-सी क्लास में कौन-सा सब्जेक्ट पढ़ाते हैं- सब होगा सार्वजनिक; नहीं लिखने पर निगेटिव मार्किंग

डूंगरगढ़ one 5 मार्च, 2026 श्रीडूंगरगढ़। अब राजस्थान के सरकारी स्कूलों में पढ़ाने वाले हर शिक्षक और कर्मचारी की पूरी जानकारी स्कूल की दीवार पर नजर आएगी। प्रारम्भिक शिक्षा विभाग के निदेशक सीताराम जाट ने राज्य के सभी मुख्य जिला शिक्षा अधिकारियों को निर्देश जारी कर व्यवस्था को जल्द लागू करने के लिए कहा है।

नई व्यवस्था के तहत स्कूल में पोस्टेड हर टीचर और कार्मिक का फोटो, नाम, एम्पलॉयी आईडी, जन्म तिथि, शैक्षणिक योग्यता, पद, विषय और वे किस क्लास को कौन-सा सब्जेक्ट पढ़ाते हैं- यह सब ‘हमारे शिक्षक-कार्मिक’ टैग के साथ प्रमुख स्थान पर लिखा जाएगा। यदि जानकारी प्रदर्शित नहीं मिली तो स्कूल की निगेटिव मार्किंग की जाएगी।

स्कूल में आने वाले हर व्यक्ति को दिखेगी जानकारी

यह सूचना ऐसे स्थान पर लिखी जाएगी, जहां स्कूल में आने वाले अभिभावक, विद्यार्थी या अन्य कोई भी व्यक्ति आसानी से देख सके।स्कूलों में पहले भी सूचना पट्ट पर जानकारी लिखने का प्रावधान था, लेकिन अधिकांश जगह यह स्पष्ट और अपडेटेड रूप में उपलब्ध नहीं रहती थी। अब इसे अनिवार्य और व्यवस्थित तरीके से लागू किया जाएगा।

निरीक्षण में होगी सख्त मॉनिटरिंग

विभाग ने स्पष्ट किया है कि जब भी शिक्षा अधिकारी या डाइट से जुड़े शिक्षक निरीक्षण पर जाएंगे, तो वे इस सूचना के आधार पर स्कूल की वास्तविक स्थिति का सत्यापन करेंगे।

निरीक्षण रिपोर्ट में यह भी दर्ज करना होगा कि शिक्षक-कार्मिकों की जानकारी दीवार पर चस्पा थी या नहीं। यदि जानकारी नहीं मिली तो संबंधित स्कूल को निगेटिव मार्किंग दी जाएगी।

कितने पद स्वीकृत, कितने भरे- सब साफ होगा

नई व्यवस्था से यह स्पष्ट हो सकेगा कि स्कूल में कुल कितने पद स्वीकृत हैं, कितने भरे हुए हैं और कितने रिक्त हैं। इससे विषयवार शिक्षकों की उपलब्धता और कमी की स्थिति भी सार्वजनिक हो जाएगी।

विभागीय अधिकारियों का दावा है कि स्टाफ संबंधी जानकारी सार्वजनिक होने से आवश्यकता अनुसार शिक्षकों की तैनाती में सुविधा होगी। किस स्कूल में किस विषय के शिक्षक की कमी है, यह तुरंत सामने आ सकेगा।

शिक्षक संगठनों ने बताया सकारात्मक कदम

शिक्षक संगठनों ने भी इस निर्णय का स्वागत किया है। उनका मानना है कि फोटो सहित पूरा विवरण प्रदर्शित होने से पारदर्शिता बढ़ेगी और अभिभावकों को स्कूल की वास्तविक स्थिति जानने में आसानी होगी।

अधिकारियों का कहना है कि फिलहाल परीक्षाएं चल रही हैं, इसलिए कुछ स्कूलों में प्रक्रिया शुरू हुई है। जल्द ही राज्य के सभी सरकारी स्कूलों में यह व्यवस्था लागू कर दी जाएगी।

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