श्री गणेश को स्मरण करते हुए, आज का दिन पंचांग के साथ शुरू होता है। शास्त्रों में कहा गया है कि तिथि का पाठ और श्रवण करने से माँ लक्ष्मी की कृपा बरसती है। वार का पाठ सुनने से आयु बढ़ती है, नक्षत्रों का श्रवण पापों का नाश करता है और योग का पाठ प्रियजनों के प्रेम को अटूट बनाए रखता है। करण का पाठ श्रवण सभी मनोकामनाओं को पूर्ण करने वाला माना गया है। इसलिए, जीवन में शुभ फलों की प्राप्ति के लिए नित्य पंचांग का अवलोकन करना चाहिए।
आज का पंचांग श्रीडूंगरगढ़ के लिए इस प्रकार है:
* तिथि: तृतीया, और चतुर्थी जो सुबह 7 बजकर 34 मिनट पर लगेगी।
* नक्षत्र: मृगशिरा, जो रात 10 बजकर 03 मिनट तक रहेगा।
* करण: विष्टि, और बव जो सुबह 7 बजकर 34 मिनट पर लगेगा।
* पक्ष: कृष्ण
* योग: शिव, जो शाम 6 बजकर 31 मिनट तक रहेगा।
* वार: शनिवार
सूर्य और चंद्रमा की गणना के अनुसार, आज सूर्योदय सुबह 6 बजकर 49 मिनट पर हुआ और सूर्यास्त शाम 5 बजकर 45 मिनट पर होगा। चंद्रोदय रात 8 बजकर 12 मिनट पर होगा, और चंद्रास्त सुबह 9 बजकर 58 मिनट पर होगा। चंद्रमा वृषभ राशि में रात 11 बजकर 15 मिनट तक रहेगा, और ऋतु हेमंत की है।
हिन्दू मास एवं वर्ष की बात करें तो, शक सम्वत 1947 विश्वावसु, काली सम्वत 5126, विक्रम सम्वत 2082 है। मास अमांत कार्तिक और मास पूर्णिमांत मार्गशीर्ष है। दिन काल 10 घंटे, 55 मिनट और 13 सेकंड का होगा।
शुभ और अशुभ समय की जानकारी भी पंचांग में दी गई है। अभिजीत मुहूर्त 11 बजकर 55 मिनट से दोपहर 12 बजकर 39 मिनट तक रहेगा। अशुभ समय में दुष्टमुहूर्त, कंटक, यमघण्ट, राहु काल, कुलिक, कालवेला/अर्द्धयाम और यमगण्ड शामिल हैं।
दिशा शूल आज पूर्व दिशा में रहेगा।
ताराबल भरणी, रोहिणी, मृगशिरा, आर्द्रा, पुनर्वसु, आश्लेषा, पूर्वा फाल्गुनी, हस्त, चित्रा, स्वाति, विशाखा, ज्येष्ठा, पूर्वाषाढ़ा, श्रवण, धनिष्ठा, शतभिषा, पूर्वाभाद्रपद, रेवती नक्षत्रों के लिए शुभ है। चन्द्रबल वृषभ, कर्क, सिंह, वृश्चिक, धनु, मीन राशियों के लिए शुभ है।
आज के चोघड़िया इस प्रकार हैं:
* प्रात: 06:50 AM से 08:12 AM तक काल
* प्रात: 08:12 AM से 09:34 AM तक शुभ
* प्रात: 09:34 AM से 10:55 AM तक रोग
* प्रात: 10:55 AM से 12:17 PM तक उद्वेग
* दोपहर 12:17 PM से 01:39 PM तक चल
* दोपहर 01:39 PM से 03:01 PM तक लाभ
* दोपहर 03:01 PM से 04:23 PM तक अमृत
* शाम 04:23 PM से 05:45 PM तक काल
और इसी क्रम में रात्रि के चोघड़िए भी दिए गए हैं।
पंचांग के अंत में पंडित जी ने शनिवार के दिन किए जाने वाले कुछ उपायों का उल्लेख किया है। शनिवार को प्रात: पीपल के पेड़ में दूध मिश्रित मीठे जल का अर्ध्य देने और सांय पीपल के नीचे तेल का दीपक जलाने से कुंडली की समस्त ग्रह बाधाओं का निवारण होता है। शनिवार के दिन पीपल के नीचे हनुमान चालीसा पढ़ने और गायत्री मन्त्र की एक माला का जाप करने से किसी भी तरह का भय नहीं रहता है, समस्त बिगड़े कार्य भी बनने लगते है। शिवपुराण के अनुसार शनि देव पिप्लाद ऋषि का स्मरण करने वाले, उनके भक्तो को कभी भी पीड़ा नहीं देते है। शनिवार के दिन पिप्पलाद श्लोक का या पिप्पलाद ऋषि जी के केवल इन तीन नामों (पिप्पलाद, गाधि, कौशिक) को जपने से शनि देव की कृपा मिलती है, शनि की पीड़ा निश्चय ही शान्त हो जाती है।
पण्डित श्रीडूंगरगढ़ ONE द्वारा यह पंचांग प्रस्तुत किया गया।