श्रीडूंगरगढ़, 25 अक्टूबर 2025। राजस्थान की गौशालाएं इन दिनों एक अभूतपूर्व संकट से जूझ रही हैं। पिछले 11 महीनों से गौशालाओं को गौ सेवा के हक का अनुदान नहीं मिला है, जिसके कारण उनके संचालन पर प्रश्नचिह्न लग गया है। गौशाला संचालक उधार पर चारा लाने को मजबूर हैं और लगातार सरकार से गुहार लगा रहे हैं कि उनकी सुनवाई हो।
हालांकि, सरकार की ओर से अभी तक कोई ठोस आश्वासन नहीं मिला है। ऐसे में, गौसेवी संस्थाओं ने व्यापक स्तर पर आंदोलन का बिगुल बजा दिया है। बीकानेर में आगामी 7 नवंबर को एक राज्यव्यापी आंदोलन की शुरुआत होने जा रही है।
गौ ग्राम सेवा संघ और बीकानेर गौशाला संघ के तत्वावधान में “गौशाला बचाओ महाआंदोलन” बीकानेर से शुरू होगा। इस आंदोलन में बीकानेर संभाग के हनुमानगढ़, श्रीगंगानगर, चूरू सहित डीडवाना और कुचामन की गौशालाएं शामिल होंगी। आयोजकों के अनुसार, इसके बाद अन्य संभाग स्तरों पर भी आंदोलन प्रदर्शन आयोजित किए जाएंगे। जनवरी 2026 में राजधानी जयपुर में एक विशाल धरने के साथ इस आंदोलन का समापन होगा।
गौ ग्राम सेवा संघ के अध्यक्ष सूरजमालसिंह निमराणा और महा आंदोलन के संयोजक जगदीश सिंह राजपुरोहित तोलियासर ने बताया कि वर्तमान सरकार द्वारा गौशालाओं को आर्थिक सहायता का अनुदान रोक दिया गया है। 11 महीने से गौशालाएं आर्थिक तंगी से जूझ रही हैं। स्थिति इतनी विकट हो गई है कि कुछ गौशालाएं गोवंश को छोड़ने पर मजबूर हो रही हैं।
संघ के पदाधिकारियों का कहना है कि एक तरफ सरकार नई-नई योजनाएं गौशालाओं पर थोप रही है, वहीं दूसरी तरफ उन्हें बिना किसी कारण प्रताड़ित किया जा रहा है। इन सभी विषयों को लेकर एक व्यापक जन आंदोलन की रणनीति बनाई गई है, ताकि गौशालाओं को सरलता से अनुदान मिल सके और उनका उत्पीड़न बंद हो।
संघ के उपाध्यक्ष सत्यनारायण स्वामी और श्रीडूंगरगढ़ तहसील अध्यक्ष मालाराम सारस्वत बापेऊ ने सरकार द्वारा भूमि अधिग्रहण में गोचर, ओरण, जोहड़ और पायतान की भूमियां लेने की मंशा पर आपत्ति जताई है और इसका विरोध करने की बात कही है। उन्होंने कहा कि अनुदान नहीं मिलने से गौशालाएं बंद होने की कगार पर पहुंच गई हैं।
आंदोलन को सफल बनाने के लिए गौशाला संचालकों, गौभक्तों और गौसेवकों से शामिल होने का आह्वान किया जा रहा है। यह आंदोलन गौशालाओं के अस्तित्व को बचाने और सरकार को उनकी समस्याओं के प्रति संवेदनशील बनाने का एक प्रयास है।