श्रीडूंगरगढ़, 1 नवंबर, 2025: कालूबास गाँव में स्थित किस्तुरी देवी राठी पशु चिकित्सालय शनिवार को अपने 12वें स्थापना दिवस पर एक विशेष उत्सव में डूबा रहा। इस अवसर पर एक दिवसीय पशु चिकित्सा शिविर का आयोजन किया गया, जिसमें आसपास के क्षेत्रों से आए पशुपालकों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।
शिविर में कुल 95 पशुओं को उपचार प्रदान किया गया, जिनमें से 5 पशुओं की शल्य चिकित्सा (ऑपरेशन) की गई। चिकित्सकों ने 40 श्वानों को रेबीज़ से बचाव के लिए टीके लगाए, ताकि इस घातक बीमारी से उन्हें सुरक्षित रखा जा सके। इसके अतिरिक्त, 50 अन्य सामान्य रोगी पशुओं का भी कुशल चिकित्सकों द्वारा उपचार किया गया।
पशुपालन विभाग द्वारा आयोजित इस शिविर में, चिकित्सालय के लिए भूमि दान करने वाले और भवन निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान देने वाले ओमप्रकाश राठी का विशेष सम्मान किया गया। उन्हें साफा, शॉल और प्रशस्ति पत्र भेंट कर उनकी उदारता के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की गई।
इस मौके पर राठी ने बताया कि 12 वर्ष पूर्व उन्होंने अपनी माता, किस्तुरी देवी के नाम पर भूमि दान की थी, जिससे कस्बे में पशु चिकित्सा सेवाओं का विस्तार हो सका। उन्होंने यह भी घोषणा की कि यदि इस पशु चिकित्सालय को पॉलीक्लीनिक में क्रमोन्नत किया जाता है, तो वे अतिरिक्त भूमि, भवन, उपकरण और अन्य आवश्यक संसाधनों की व्यवस्था करने में अपना सहयोग देंगे।
राठी ने जीव दया गौशाला के नाम से 11 हजार रुपये की सहयोग राशि भी चिकित्सालय को भेंट की। इसके अतिरिक्त, दानदाता दिलीप कुमार ने कम्प्यूटर व प्रिंटर, सुशील मूंधड़ा ने डेजर्ट कूलर और सरदाराराम बाना ने फर्नीचर की व्यवस्था की, जिससे चिकित्सालय की सुविधाओं में और वृद्धि हुई। विभाग ने इन सभी दानदाताओं के प्रति हार्दिक आभार व्यक्त किया और उन्हें सम्मानित किया।
पशुपालन विभाग के डॉ. नरेश सक्सेना, ब्लॉक चिकित्सा अधिकारी डॉ. दिनू खां, डॉ. सुभाष घारू, डॉ. रूचि पटवा, गजानंद और उदयसिंह बाना जैसे गणमान्य व्यक्ति इस कार्यक्रम में उपस्थित थे। विभागीय कर्मचारियों ने दानदाताओं का सम्मान किया और पशु चिकित्सालय की सेवाओं के विस्तार के लिए उनसे सहयोग की अपेक्षा की।
कार्यक्रम में सहदेव, रामसिंह जाखड़, नीरू, शमा, रविशंकर पांडे, रामनिवास, राजू डेलू, और सलीम जैसे सक्रिय कार्यकर्ताओं ने अपनी सेवाएं दीं। डॉ. घारू ने कार्यक्रम का मंच संचालन किया, जबकि डॉ. दीनू खां ने सभी के प्रति आभार व्यक्त किया।
यह आयोजन न केवल पशु चिकित्सा सेवाओं के प्रति जागरूकता बढ़ाने का एक अवसर था, बल्कि यह समुदाय की एकजुटता और पशु कल्याण के प्रति संवेदनशीलता का भी प्रतीक था।