WhatsApp Menu
बिग्गाजी मंदिर में सैंकड़ो श्रद्धालुओं ने लगाई धोक, ध्वजा बांध मांगी मन्नतें।  |  धड़ देवली धाम में आस्था का सैलाब, बिग्गाजी महाराज के दरबार में हजारों श्रद्धालुओं ने टेका माथा  |  ब्राइट फ्यूचर के सितारों ने 12वीं में किया नाम रोशन, हासिल किया बेहतरीन  |  मादक पदार्थो की तलाश में क्षेत्र के इस गांव में पहुंची एंटी नारकोटिक्स टीम, दी दबिश, हो रही तलाशी।  |  श्रीडूंगरगढ़ क्षेत्र की दो खबरें पढ़े एक साथ  | 

5 अक्टूबर का पंचांग के साथ जाने और भी कई खास बातें पंडित श्रीडूंगरगढ़ ONE के साथ।

आज श्रीडूंगरगढ़ में, सनातन संस्कृति में पंचांग के महत्व को रेखांकित करते हुए, दिन की शुभता और विशिष्टताओं पर प्रकाश डाला गया। पंचांग, जो तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण का एक समग्र विवरण है, न केवल समय का मापक है, बल्कि यह जीवन को शुभ फलों से जोड़ने का भी एक मार्ग है।

शास्त्रों में वर्णित है कि तिथि के श्रवण से माँ लक्ष्मी की कृपा प्राप्त होती है, वार सुनने से आयु बढ़ती है, नक्षत्र सुनने से पापों का नाश होता है, योग सुनने से प्रियजनों का प्रेम बना रहता है, और करण के श्रवण से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। इसी मान्यता के साथ, आज का पंचांग प्रस्तुत किया गया।

आज, विक्रम संवत 2082 में आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि है, जो दोपहर 3 बजकर 5 मिनट तक रहेगी। नक्षत्र शतभिषा, पूर्वाभाद्रपद सुबह 8 बजकर 2 मिनट तक रहेगा। योग गण्ड दोपहर 4 बजकर 34 मिनट तक है। वार रविवार है।

सूर्य और चंद्रमा की स्थिति पर ध्यान दें तो सूर्योदय 6 बजकर 28 मिनट पर हुआ और सूर्यास्त 6 बजकर 16 मिनट पर होगा। चंद्रोदय शाम 5 बजकर 7 मिनट पर होगा और चंद्रास्त सुबह 5 बजकर 18 मिनट पर। ऋतु शरद है और चन्द्र राशि कुंभ राशि में 00:46 AM तक है।

पंचांग में शुभ और अशुभ समयों का भी विवरण दिया गया है। अभिजीत मुहूर्त दिन के 11 बजकर 58 मिनट से 12 बजकर 45 मिनट तक रहेगा। राहु काल शाम 4 बजकर 47 मिनट से 6 बजकर 16 मिनट तक रहेगा। दिशा शूल पश्चिम दिशा में है।

ताराबल में अश्विनी, कृत्तिका, मृगशिरा आदि नक्षत्र शुभ बताए गए हैं, वहीं चन्द्रबल मेष, वृषभ, सिंह, कन्या आदि राशियों के लिए अनुकूल है।

इसके अतिरिक्त, दिन के विभिन्न कार्यों के लिए चोघड़िया मुहूर्त और लग्न तालिका भी दी गई है, जो दिन को शुभ और अनुकूल बनाने में सहायक हो सकती है।

पंडित श्रीडूंगरगढ़ ONE ने जानकारी देते हुए बताया कि रविवार के दिन सूर्य पूजा का विशेष महत्व है। इस दिन तांबे के लोटे में जल, चावल, लाल फूल और रोली डालकर सूर्य देव को अर्घ्य देना चाहिए। आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ करना और यथासंभव मीठा भोजन करना भी शुभ फलदायी माना जाता है। मान्यता है कि ऐसा करने से घर-परिवार और समाज में मान-सम्मान की प्राप्ति होती है। सूर्य देव को जल देने से पितृ कृपा भी मिलती है।

भैरव जी की आराधना का भी रविवार को विशेष महत्व है। उनके दर्शन से भय और संकट दूर होते हैं, साहस और बल की प्राप्ति होती है। उनके मंत्र “ॐ काल भैरवाय नमः” या “ॐ श्री भैरवाय नमः” का जाप करने से रोग, अकाल मृत्यु से बचाव होता है और मनोवांछित लाभ मिलता है।

पंडित जी ने यह भी जानकारी दी कि पूर्णिमा व्रत और क्षीरपान, कोजागरी व्रत कल है और पंचक जारी है।

इस प्रकार, श्रीडूंगरगढ़ में आज का दिन पंचांग के ज्ञान और धार्मिक आचरणों के साथ शुभता और मंगलकामनाओं से परिपूर्ण है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

home होम layers मोबाइल नंबर mic ऑडियोज़ smart_display शॉर्ट्स theaters शोज़