आज मार्गशीर्ष मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी है, जो पूर्णिमा की ओर अग्रसर है। नक्षत्र कृत्तिका में चंद्रमा अपनी आभा बिखेर रहा है और योग शिव है, जो मन को शांति और स्थिरता प्रदान करता है।
पंचांग के अनुसार, आज अभिजीत मुहूर्त में शुभ कार्य किए जा सकते हैं। वहीं, राहु काल में किसी भी नए कार्य की शुरुआत से बचने की सलाह दी जाती है। दिशा शूल दक्षिण दिशा में होने से उस दिशा में यात्रा करने से पहले विचार करने की बात कही गई है।
आज के दिन अन्नपूर्णा जयंती, दत्तात्रेय जयंती, त्रिपुर भैरवी जयंती और पूर्णिमा व्रत का भी विशेष महत्व है।
गुरुवार के दिन कुछ विशेष कार्यों को करने से बचने की सलाह दी गई है, जैसे कि सिर धोना या शरीर में साबुन लगाना, क्योंकि ऐसा माना जाता है कि इससे घर से लक्ष्मी रूठ जाती हैं। इसके विपरीत, केले के पेड़ पर चने की दाल, हल्दी और गुड़ चढ़ाने और दीपक जलाने से बृहस्पति देव प्रसन्न होते हैं, जिससे दाम्पत्य जीवन में सुख और प्रेम बढ़ता है। अविवाहितों के लिए हल्दी का उबटन लगाना योग्य जीवन साथी की प्राप्ति में सहायक माना जाता है।
विष्णु जी की उपासना और विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ आज के दिन विशेष फलदाई बताया गया है।
यह दिन, श्रीडूंगरगढ़ के लोगों के लिए, परंपराओं और विश्वासों के साथ जुड़ा हुआ है, जो उन्हें अपने जीवन में शुभता और समृद्धि की ओर ले जाने में मार्गदर्शन करते हैं।