**श्रीडूंगरगढ़, 31 जुलाई 2025**
आज का पंचांग
शास्त्रों के अनुसार, तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण का श्रवण एवं पठन कल्याणकारी माना गया है। पंचांग के अनुसार, इनसे क्रमशः माँ लक्ष्मी की कृपा, आयु में वृद्धि, पापों का नाश, प्रियजनों का प्रेम और मनोकामनाओं की पूर्ति होती है। इसलिए, शुभ फलों की प्राप्ति के लिए नित्य पंचांग का अवलोकन करना चाहिए।
**आज की तिथि:**
* तिथि: सप्तमी (प्रातः 05:00 बजे तक)
* नक्षत्र: चित्रा (प्रातः 00:42 बजे तक)
* करण: गर, वणिज (अपराह्न 03:50 बजे तक)
* पक्ष: शुक्ल
* योग: साघ्य (अपराह्न 04:32 बजे तक)
* वार: गुरुवार
**सूर्य एवं चंद्र गणना:**
* सूर्योदय: प्रातः 05:55 बजे
* चंद्रोदय: पूर्वाह्न 11:50 बजे
* चंद्र राशि: कन्या (पूर्वाह्न 11:16 बजे तक)
* चंद्र वास: दक्षिण (पूर्वाह्न 11:16 बजे तक)
* सूर्यास्त: सायं 07:24 बजे
* चंद्रास्त: रात्रि 11:10 बजे
* ऋतु: वर्षा
**हिन्दू मास एवं वर्ष:**
* शक सम्वत: 1947 विश्वावसु
* विक्रम सम्वत: 2082
* मास अमांत: श्रावण
* मास पूर्णिमांत: श्रावण
**शुभ एवं अशुभ समय:**
* अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 12:13 बजे से दोपहर 01:07 बजे तक
* राहुकाल: दोपहर 02:21 बजे से सायं 04:02 बजे तक
* दिशा शूल: दक्षिण
**ताराबल:**
भरणी, रोहिणी, मृगशिरा, आर्द्रा, पुनर्वसु, आश्लेषा, पूर्वा फाल्गुनी, हस्त, चित्रा, स्वाति, विशाखा, ज्येष्ठा, पूर्वाषाढ़ा, श्रवण, धनिष्ठा, शतभिषा, पूर्वाभाद्रपद, रेवती
**चंद्रबल:**
मेष, कर्क, कन्या, वृश्चिक, धनु
**चौघड़िया:**
* प्रातः 05:55 AM – 07:37 AM: शुभ
* प्रातः 07:37 AM – 09:18 AM: रोग
* प्रातः 09:18 AM – 10:59 AM: उद्वेग
* प्रातः 10:59 AM – 12:40 PM: चल
* दोपहर 12:40 PM – 02:21 PM: लाभ
* दोपहर 02:21 PM – 04:02 PM: अमृत
* सायं 04:02 PM – 05:43 PM: काल
* सायं 05:43 PM – 07:24 PM: शुभ
* रात्रि 07:24 PM – 08:43 PM: अमृत
* रात्रि 08:43 PM – 10:02 PM: चल
* रात्रि 10:02 PM – 11:21 PM: रोग
* रात्रि 11:21 PM – 00:40 AM: काल
* रात्रि 00:40 AM – 01:59 AM: लाभ
* रात्रि 01:59 AM – 03:18 AM: उद्वेग
* प्रातः 03:18 AM – 04:37 AM: शुभ
* प्रातः 04:37 AM – 05:55 AM: अमृत
**लग्न तालिका:** (विस्तृत समय सारणी दी गई है)
**गुरुवार के विशेष उपाय:**
मान्यता है कि गुरुवार को सिर धोने, साबुन लगाने या कपड़े धोने से लक्ष्मी रुष्ट होती हैं। इस दिन पीतल के बर्तन में चने की दाल, हल्दी और गुड़ डालकर केले के पेड़ पर अर्पित करें और दीपक जलाएं। इससे बृहस्पति देव प्रसन्न होते हैं और दांपत्य जीवन सुखमय होता है। चने की दाल को आटे में हल्दी के साथ मिलाकर गाय को खिलाएं और दूसरे हिस्से में शहद मिलाकर सेवन करें। महिलाओं द्वारा हल्दी का उबटन लगाने से दांपत्य जीवन में प्रेम बढ़ता है और कुंवारी कन्याओं को योग्य जीवनसाथी मिलता है। गुरुवार को विष्णु जी की उपासना और विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ फलदायी होता है।
आज तुलसीदास जयंती है।
(संपर्क सूत्र)